-प्रक्रिया में निभाई सक्रिय भूमिका, हर उम्मीदवार की राजनीतिक क्षमता का किया आकलन
विनोद डबास
नई दिल्ली। एमसीडी के 12 वार्डों में उपचुनाव को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी सरकार की पहली बड़ी परीक्षा बना दिया है। भाजपा की टिकट वितरण की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री ने न सिर्फ सक्रिय भूमिका निभाई बल्कि हर उम्मीदवार की राजनीतिक क्षमता, सामाजिक समीकरण और स्थानीय पकड़ का खुद आकलन किया। कहा जा रहा है कि यह चुनाव केवल वार्ड स्तर की लड़ाई नहीं, बल्कि रेखा गुप्ता की लोकप्रियता और उनकी नेतृत्व शैली पर जनता की पहली राय है।
भाजपा के भीतर टिकट चयन को लेकर इस बार ‘टॉप डाउन’ अप्रोच अपनाई गई। पहले से तय फार्मूले को दरकिनार कर मुख्यमंत्री ने सीधे रिपोर्ट मंगवाकर दावेदारों के नाम तय किए। हर सीट पर कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया, बूथ स्तर की रिपोर्ट और स्थानीय जनभावना का विश्लेषण करवाया गया। सूत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री ने विधायकों और सांसदों को स्पष्ट कहा कि सिर्फ वही नाम सुझाए जिन पर जीत की गारंटी हो, सिफारिशें नहीं, जीत चाहिए।
भाजपा संगठन के सूत्रों के मुताबिक, 12 में से नौ वार्डों में मुख्यमंत्री की पसंद के उम्मीदवारों को टिकट मिला। यह वही वार्ड हैं, जहां भाजपा का सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी से है और पिछली बार भाजपा ने जीत हासिल की थी। रेखा गुप्ता ने इन वार्डों को ‘हाई इम्पैक्ट जोन’ घोषित करते हुए व्यक्तिगत रूप से रणनीति तय की है। भाजपा में यह पहला मौका है जब टिकट वितरण में मुख्यमंत्री की भूमिका इतनी निर्णायक रही। प्रदेश नेतृत्व ने भी यह संकेत साफ कर दिया है कि उपचुनाव के परिणाम सीधे रेखा गुप्ता सरकार के कामकाज से जोड़े जाएंगे। इसीलिए चयन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर संगठनात्मक दबाव या गुटबाजी को जगह नहीं दी गई।
12 में से नौ वार्ड भाजपा के पास थे
दिल्ली के इन 12 वार्डों में से नौ वार्ड पहले भाजपा के पास थे, जबकि तीन वार्ड आम आदमी पार्टी के कब्जे में थे। खास बात यह है कि इनमें से दो ऐसे वार्ड हैं, जहां भाजपा वर्ष 2022 में मामूली जीती थी। मुख्यमंत्री ने भाजपा के जीत वाले वार्डों में उम्मीदवार तय करने से पहले खुद फील्ड रिपोर्ट मंगाई और बूथ स्तर पर समीकरणों का अध्ययन कराया। पार्टी के अंदर यह चर्चा भी गर्म है कि तीन वार्डों पर मुख्यमंत्री और संगठन के बीच सहमति देर से बनी। इनमें एक-दो नाम ऐसे थे जिन पर मुख्यमंत्री को पूर्ण भरोसा नहीं था, लेकिन स्थानीय समीकरणों को देखते हुए समझौता करना पड़ा।
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रेखा सरकार की पहली जन परीक्षा
यह उपचुनाव रेखा गुप्ता सरकार के कामकाज की पहली जन परीक्षा है। अगर भाजपा इन वार्डों में बढ़त बनाती है, तो इसे मुख्यमंत्री की नेतृत्व शैली की स्वीकृति माना जाएगा। लेकिन अगर नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे, तो विपक्ष इसे रेखा गुप्ता की पहली ‘राजनीतिक चेतावनी’ के रूप में पेश करेगा।