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विवादित जमीनों के केस बने अधिवक्ता की जान के दुश्मन

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ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 36 में हुई एडवोकेट की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी और जानकारी देते पुल? - फोटो : Grnoida
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विवादित जमीनों के केस बने अधिवक्ता की जान के दुश्मन
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ग्रेटर नोएडा। विवादित जमीनों के केस लेना ही अधिवक्ता फतेह मोहम्मद के लिए जानलेवा साबित हो गया। पुलिस ने बताया कि अधिवक्ता ने लगभग 125 करोड़ रुपये कीमत की विवादित जमीनों के केस ले रखे थे। वहीं, अधिवक्ता के पास वही लोग केस लेकर आते थे, जो यह मानकर चलते थे कि उन्हें जमीन पर कब्जा मिलना मुश्किल है। हत्याकांड में दो और साजिशकर्ताओं राकेश कुमार सिंह निवासी ग्राम रामपुर बांगर और मोहम्मद शमीम मूल निवासी जनपद सिद्धार्थनगर वर्तमान पता जामियानगर दिल्ली को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें से एक अधिवक्ता का परिचित है। वह भी विवादित जमीन के केस में पैरवी करता था। बुधवार को मुठभेड़ के बाद पुलिस ने अधिवक्ता की हत्या करने वाले शूटर संजीव उर्फ सोनू व मुख्य साजिशकर्ता सुभाष को गिरफ्तार किया था। प्रेसवार्ता में डीसीपी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि अधिवक्ता केस जीतने पर फीस के बजाय जमीन में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी पर अनुबंध करते थे। बताया कि सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया। डीसीपी ने बताया कि जांच में राकेश और शमीम का नाम प्रकाश में आया था।
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इन विवादित जमीनों के केस थे अधिवक्ता के पास
अधिवक्ता ने ग्रेनो वेस्ट के चिपियाना बुजुर्ग में 56 करोड़ की कीमत की 72 बीघा, अटाई मुरादपुर में 36 करोड़ की 120 बीघा और नोएडा के सेक्टर-44 में 30 करोड़ की 2200 गज विवादित जमीन का केस ले रखा था। 2200 गज जमीन का विवाद कमल सिंह व अजय पाल के बीच चल रहा था। उक्त जमीन को वापस दिलाने की एवज में अधिवक्ता ने कमल सिंह से 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पर अनुबंध किया था। केस में पैरवी के लिए अधिवक्ता ने मोहम्मद शमीम को तैयार किया था। जमीन के आदेश पारित कराने के एवज में शमीम अधिवक्ता से 25 प्रतिशत यानी 550 गज भूमि का अनुबंध कराना चाहता था, लेकिन अधिवक्ता ने मना कर दिया। इससे नाराज शमीम अधिवक्ता से रंजिश मानने लगा। इसी तरह अधिवक्ता ने अटाई मुरादपुर में किसानों को मुआवजा दिलाने की गारंटी ली थी। इसमें भी मोहम्मद शमीम से सहयोग मांगा था। अधिवक्ता ने इसी जमीन का 50 प्रतिशत हिस्से का लालच राकेश कुमार सिंह को दिया था। इसके लिए अधिवक्ता ने अपने बेटे से 100 रुपये के स्टांप पर अनुबंध भी कराया था, लेकिन राकेश को जमीन नहीं मिली। वहीं, चिपियाना बुजुर्ग में 72 बीघा जमीन का 31 किसानों के नाम पट्टा था। अधिवक्ता ने फर्जी तरीके से सात रिश्तेदारों के नाम जमीन का पट्टा करा लिया था। मामले में अभियुक्त सुभाष चंद किसानों की तरफ से पैरवी कर रहा था। इस मामले में अधिवक्ता केस जीत भी गए थे। इससे नाराज सुभाष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्टे ऑर्डर के लिए याचिका डाल रखी थी।
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