गड्ढे से पानी निकालने के लिए 5 साल तक तैयारी करता रहा प्राधिकरण
- सिंचाई विभाग, प्रशासन के साथ की कई बैठकें, जमीन पर नहीं हुआ काम,
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-150 में बेसमेंट के गड्ढे में भरे जिस पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हुई नोएडा प्राधिकरण उसे पांच वर्षो में भी नहीं निकाल पाया। वर्ष 2020 में गड्ढे से पानी को निकालने की तैयारी शुरू हुई थी। वर्ष 2025 के अंत तक प्राधिकरण, प्रशासन और सिंचाई विभाग की इसको लेकर बैठक करता रहा। प्राधिकरण सिंचाई विभाग से इस पानी को निकालने के लिए अस्थायी रेगुलेटर बनवाने की मांग कर रहा था। इसमें 2023 में प्राधिकरण ने सिंचाई विभाग के साथ सर्वे किया था। यह तय हुआ था कि हिंडन तक जल निकासी की प्रबंध किया जाए। करीब 15 करोड़ रुपये का टेंडर भी तैयार हुआ था। इसके बाद योजना की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।
वर्ष 2024 में फिर तैयारी और बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। इस बार सिंचाई विभाग की तरफ से लागत पहले की तुलना में ज्यादा बताई गई। प्राधिकरण में फिर फाइल वहीं पर दब गई जहां से निकली थी। वहीं दूसरी तरफ प्राधिकरण ने खुद भी अपने स्तर पर पंपिंग सेट लगवाकर पानी निकलवाने की योजना बनाई थी। लेकिन पानी ज्यादा होने की वजह से योजना आगे नहीं बढ़ पाई। यह बात भी निकल कर सामने आ रही है कि ये फाइल वर्क सर्कल-10 और जल विभाग के स्तर पर रुकी रही।
इसके साथ ही 2024 से पहले बिल्डर को भी वर्क सर्कल ने कई नोटिस जारी किए थे। जुर्माना लगाए जाने की भी बात है। वहीं एक पत्र और भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जो कि विशटाउन बिल्डर की तरफ से प्राधिकरण को भेजे जाने की बात कही जा रही है। दावा है कि पत्र 2022 में ही भेजा गया था। इस पत्र में सीवर और मुख्य नाली लाइनों के टूटने की बात कही गई थी, जिसके कारण प्लॉट में सीवर और बारिश का पानी जमा हो गया था। पत्र में सीवर लाइन, नालों को ठीक न किए जाने की स्थिति में दुर्घटना को लेकर आशंका भी जताई गई थी। यह बात जरूर है कि प्राधिकरण अधिकारी यह पत्र मिलने की पुष्टि अभी नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पत्र किस स्तर पर दिया गया था या नहीं दिया गया था इसकी जानकारी नहीं है।
सीबीआई ने भी खंगाली फाइल, पहले से चल रही है जांच
सेक्टर-150 हादसे के बाद स्पोर्टस् सिटी का प्लाट नंबर-2 पर हुआ उप-विभाजन चर्चा में आया। करीब 13.29 लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल के इस प्लाट का आवंटन 7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन लीड मेंबर की अगुवाई में बने समूह को हुआ था। इस आवंटन और बाद में खेल सुविधाएं विकसित न होने और स्पोर्ट्स सिटी फंसने के भ्रष्टाचार पर जांच सीबीआई पहले से कर रही है। अब ए-3 प्लाट के उप-विभाजन की फाइल भी सीबीआई की तरफ से तलब किए जाने की सूचना है। यह भी बताया जा रहा है कि सीबीआई ने अपने मुख्यालय बुलाकर स्पोर्ट्स सिटी विभाग के बाबुओं से इस सब-डिवीजन को लेकर जानकारी ली है।