चकसराय (ऊना)। जिले के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) और वकील दिन-रात अपने दफ्तरों में जुटे हुए हैं। इनके लिए ऑडिट करना किसी आफत से कम नहीं है। इनकम टैक्स विभाग की ओर से जिन व्यवसायियों की फर्मों की ऑडिट रिपोर्ट की अंतिम तिथि 30 सितंबर तय की गई है और रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर रखी गई है, इस पर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का कहना है कि हजारों फाइलों को एक साथ तैयार करना संभव नहीं है। इसके बावजूद अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण वे लगातार ऑफिसों में बैठकर ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
हाल ही में 16 सितंबर को जिन फर्मों का ऑडिट नहीं हुआ, उनकी रिटर्न फाइलिंग का कार्य पूरा किया गया। अब 30 सितंबर की तिथि नजदीक आने से सीए और वकीलों पर दबाव और बढ़ गया है। पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें आने से काम और भी कठिन हो रहा है। कई बार फाइल अपलोड करने में घंटों लग जाते हैं।
स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि सीए और वकीलों पर काम का इतना दबाव है कि उन्हें काम समय पर निपटा पाना मुश्किल हो रहा है। रिटर्न समय पर दाखिल न होने की स्थिति में पेनल्टी और ब्याज का डर सताता है। छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारी खासतौर पर इस स्थिति से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
व्यवसायी और सीए दोनों का कहना है कि सरकार को कम से कम ऑडिट की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाना चाहिए।
सीए रविंद्र शर्मा का कहना है कि एक ही समय सीमा में हजारों ऑडिट पूरे करना नामुमकिन जैसा है। पोर्टल की तकनीकी दिक्कतें और पेपरवर्क का दबाव दोनों ही परेशान कर रहे हैं। वहीं अधिवक्ता दीपक शर्मा ने कहा कि इनकम टैक्स विभाग को जमीनी हालात समझने चाहिए। टैक्स रिटर्न की अंतिम तिथि बढ़ाना व्यवसायियों और प्रोफेशनल्स दोनों के हित में है।