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Noida News: सेना के अधिकारी को नहीं बनाया सदस्य, खामियां मिलीं तो अध्यक्ष व सचिव को ही हटाने का आदेश

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सेना के अधिकारी को नहीं बनाया सदस्य, खामियां मिलीं तो अध्यक्ष व सचिव को ही हटाने का आदेश
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अपर आवास आयुक्त और अपर निबंधक आवासीय सहकारी समिति ने कहा, 15 दिन में फैसला लेकर बताएं
आईटीबीपी सहकारी आवास समिति ग्रेटर नोएडा में फ्लैट खरीदने के बाद सदस्यता नहीं देने का मामला

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पहलगाम में तैनात सेना के एक अधिकारी को फ्लैट खरीदने और लीज डीड होने के बाद भी आवासीय समिति की सदस्यता नहीं देने के मामले में अब अध्यक्ष और सचिव को ही हटाने का आदेश हो गया है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) सहकारी आवास समिति, ग्रेटर नोएडा के मामले में यह कार्रवाई अपर आवास आयुक्त और अपर निबंधक आवासीय सहकारी समिति ने की है।
अपर निबंधक दीपक सिंह ने आदेश में कहा है कि दोनों पदाधिकारी को प्रबंध समिति के इन पदों से हटाकर 15 दिन में जवाब भेजें। आदेश के मुताबिक गाजियाबाद स्थित सहकारी अधिकारी की जांच में यह सामने आया कि एक सेवारत सैन्य अधिकारी मेजर राहुल सिंह को जानबूझकर समिति की सदस्यता से वंचित रखा गया। जबकि उनकी फ्लैट खरीद और लीज ट्रांसफर को खुद भी ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने भी वैध माना था। इसके बाद भी सदस्यता देने की जगह स्थानीय कोर्ट में प्रकरण में वाद प्रचलित होने की जानकारी देकर सदस्यता के आवेदन को लंबित रखा गया। इसे जांच में उत्पीड़न की श्रेणी में रखा गया। मेजर राहुल सिंह का कहना है कि जांच रिपोर्ट में अधिकारी ने प्रबंध समिति के इस दावे को भ्रामक बताया जिसमें आईटीबीपी अधिकारी या उनके निकट संबंधी या विधवा ही सदस्य बन सकते हैं। जबकि उनके सदस्यता के आवेदन का प्रकरण उस अवधि का है जब ऐसा कोई प्रतिबंध लागू ही नहीं था। जांच अधिकारी ने माना कि इस प्रकार नियमों की मनमानी व्याख्या कर अधिकारों का दुरुपयोग किया गया। समिति के सचिव ने पक्ष रखते हुए कहा कि केवल आईटीबीपी के अधिकारी ही यहां फ़्लैट खरीद सकते हैं। बिना सदस्य बने ही राहुल सिंह ने फ्लैट खरीदा था। समिति का बायलॉज अब परिवर्तित हो गया है।
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जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रबंध समिति के पदाधिकारियों पर ब्रोकरों के माध्यम से संपत्ति क्रय-विक्रय किए जाने के आरोप सामने आए हैं। पदाधिकारियों के पास खुद ही एक से अधिक फ्लैट का स्वामित्व है। पदाधिकारियों के निकट संबंधियों के नाम पर फ्लैट होने के संकेत पाए गए हैं। इसे सहकारी भावना एवं नियमों के विपरीत माना गया। समिति द्वारा समय पर लेखा-परीक्षण (ऑडिट) रिपोर्ट प्रस्तुत न किए जाने को भी गंभीर अनियमितता माना गया है।
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जांच में शामिल नहीं हुए पदाधिकारी
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 19 जनवरी को अपना पक्ष रखने के लिए प्रबंध समिति का कोई पदाधिकारी मौजूद नहीं रहा। जबकि मेजर राहुल सिंह अपना पक्ष रखने पहुंचे। 21 जनवरी को सैन्य अधिकारी को सदस्य बनाने के आदेश पर भी कार्यवाही नहीं हुई। आधिकारिक समीक्षा और भ्रमण कार्यक्रम के लिए बैैठक के लिए भी आदेश की अवहेलना प्रबंध समिति ने की। इसके लिए तीन दिन में जवाब देने के लिए नोटिस को भी अनदेखा किया गया। अब अपर निबंधक ने सहकारी अधिकारी आवास सतीश कुमार को ही रूटीन के काम जैसे बिल आदि के भुगतान के लिए अधिकृत किया है।
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