50 फीसदी हुआ महंगा हुआ टफन ग्लास,
40 फीसदी कंपनियां बंद होने की कगार पर
50 फीसदी श्रमिक काम छोड़ घर निकले
कच्चे माल और कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति ठप, होटल और रेस्तरां में खाना महंगा
ऋषभ कौशल
नोएडा। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से चौतरफा मार पड़ने लगी है। एक तरफ गैस की किल्लत से होटल और रेस्तरां में खान-पान महंगा हो गया है तो दूसरी ओर सरिया, एल्युमीनियम समेत टफन ग्लास की कीमतों में 40 से 50 फीसदी तक उछाल आई है। ऐसे में विनिर्माण इकाइयां सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं।
मकान निर्माण के उपयोग में आने वाले सरिया, एल्युमीनियम, तांबा और अन्य धातु निर्मित उत्पादों के दाम बढ़ने से उद्यमी, बिल्डर और आम जनता परेशान हैं। टफन ग्लास का इस्तेमाल आईटी कंपनियों, कॉरपोरेट ऑफिस और आधुनिक बिल्डिंग स्ट्रक्चर समेत वाहनों के शीशों समेत अन्य निर्माण में बड़े पैमाने पर होता है। इसकी कीमत में 40-50 फीसदी तक की उछाल आ चुका है।
टफन ग्लास के उद्यमियों ने बताया कि जो ग्लास की शीट तैयार होती है उसके निर्माण में, शीट को मोड़ने से लेकर उसको आकार देने में गैस के जरिए उसे गर्म किया जाता है फिर उसे सांचे में रखा जाता है। ऐसे में गैस और कच्चे माल की किल्लत बढ़ने से दाम में सीधा असर पड़ा है। ऐसे में ग्लास की शीट महंगी होने से जो 12 एमएम का ग्लास 125 रुपये का बिकता था वह अब 180 रुपये में बिक रहा है। यही हाल पॉलिमर इंजेक्शन से लेकर टायर, वायरिंग समेत रोजमर्रा के काम आने वाले प्लास्टिक आधारित कई सामान पर भी पड़ा है। कपड़े तैयार करने की प्रकिया में भाग देने के लिए लगने वाली ऊर्जा में भी गैस का खर्च होता है, जो फिलहाल मिलना बंद हो चुकी है।
40 फीसदी उद्योग बंद होने के कगार पर, 50 फीसदी तक घटे श्रमिक
जिले के कारोबारियों के अनुसार, जिले की करीब 40 फीसदी उद्योग बंदी की कगार पर आ चुके हैं। उत्पादन कार्य अभी से ठप पड़ा है। करीब 50 फीसदी श्रमिक पहले ही घट चुके हैं, उन्हें रोकना भी मुश्किल हो रहा है।
उद्योग का प्रकार यूनिट श्रमिक
खान पान 4910 54820
धातु के उत्पाद 2151 88501
कॉटन टेक्सटाइल 6619 92883
प्लास्टिक व रबर 2203 18548
(साल 2025 तक, सरकारी आकड़ों के अनुसार)
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टफन ग्लास की शीट महंगी आ रही है। इससे तैयार होने वाले अन्य उत्पाद भी महंगे हो गए हैं। युद्ध चलता रहा तो 20% और उछाल आएगा-अश्विनी शर्मा, टफन ग्लास कारोबारी
सरिया, एल्युमीनियम समेत अन्य धातु 20 फीसदी से ज्यादा महंगी हो चुकी हैं यह समझना भी मुश्किल है कि ऐसी स्थिति से कैसे निपटा जाए। -सतनारायण गोयल, धातु कारोबारी
कंपनी से 50 फीसदी श्रमिक काम छोड़कर जा चुके हैं। जिन उद्यमियों से बात हो रही है वह भी बंद होने की कगार पर बता रहे। - निर्मल कांत गोयल, इलेक्ट्रिक उपक्रम कारोबारी
बड़ी कंपनियां इस स्थिति का लाभ उठाकर सट्टेबाजी कर रही हैं। इससे धातु और प्लास्टिक महंगे हुए हैं। इसका असर छोटे उद्योगों पर पड़ रहा।-नवीन गुप्ता, चेयरमैन, आईआईए नोएडा चैप्टर