मेरठ। लोहियानगर में कूड़ा निस्तारण प्लांट के टेंडर में अनियमितता के आरोप लगने से निगम की प्रक्रिया विवादों में उलझ गई है। चार दिन से टेंडर की प्रक्रिया को लेकर निगम में घमासान मचा हुआ है। शुक्रवार को टेंडर का यह मामला कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद के सामने भी पहुंचा है। अब नगर निगम ने कूड़ा निस्तारण प्लांट खुद संचालित कराने की नई कार्य योजना बना ली है।
लोहियानगर के कूड़े का निस्तारण कराने के लिए करोड़ों रुपये का टेंडर निकाला गया था। इसमें चार कंपनियों ने भाग लिया। तकनीकी और वित्तीय बोलियां खोली गईं। एक कंपनी ने निगम की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया। इस पर महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि फाइनेंस ब्रीड खोलने से पहले मुख्य नगर लेखा परीक्षक के हस्ताक्षर नहीं हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि योगी सरकार में इस तरह की अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं होंगी और टेंडर को निरस्त कर नई प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इसके बावजूद निगम ने टेंडर को निरस्त नहीं किया और विवाद बढ़ता चला गया।
नगर आयुक्त ने शुक्रवार को लोहियानगर कूड़ा प्लांट संचालित करने के लिए एक नई कार्य योजना बनाई है। बृहस्पतिवार को निरीक्षण में पता चला कि कूड़ा प्रसंस्करण केंद्र पर लगी मशीनें लगभग जर्जर हो चुकी हैं और बेहद धीमी गति से काम कर रही हैं। कूड़े का ढेर चारों ओर फैला है और वातावरण दूषित हो रहा है। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लीगेसी वेस्ट निस्तारण के लिए पहले ई-निविदा आमंत्रित की गई थीं, परंतु प्रक्रिया अधूरी रह गई और स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इस संबंध में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहले ही कड़े निर्देश और चेतावनी जारी कर चुका है।
टेंडर निरस्त होगा या नहीं, समिति करेगी तय
महापौर ने स्पष्ट कर दिया कि टेंडर की फाइनेंस ब्रीड खोलने से पहले मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव के हस्ताक्षर होने चाहिए थे। योगी सरकार में टेंडर की प्रक्रिया में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। चार दिन से टेंडर की प्रक्रिया अटकी हुई है। टेंडर की प्रक्रिया में अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी, मुख्य एवं वित्त लेखाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव व अधिशासी अभियंता निर्माण की संयुक्त समिति बनी है। समिति ही तय करेगी कि टेंडर निरस्त हो या नहीं।