बलरामपुर। सर्दी की दस्तक के साथ ही बच्चों के फेफड़ों पर वायरस का हमला तेज हो गया है। जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले हर दसवें निमोनिया मरीज में वायरल संक्रमण पाया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक सर्दी-जुखाम ठीक न हो तो यह फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर रूप ले लेता है, जिसे वायरल निमोनिया कहा जाता है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मुकेश साहनी ने बताया कि इन दिनों कई प्रकार के वायरस बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। ओपीडी में रोजाना 50 से 55 बच्चे जांच के लिए आते हैं, जिनमें से करीब 10 प्रतिशत में निमोनिया की पुष्टि हो रही है। उन्होंने बताया कि वायरल निमोनिया का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं और नीबुलाइजर थेरेपी से किया जाता है।
मरीज को सामान्यतः पांच दिन का एंटीबायोटिक कोर्स दिया जाता है। डॉ. साहनी ने चेतावनी दी कि यदि सर्दी-जुखाम फेफड़ों तक पहुंच जाए तो बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण का रूप ले लेता है। फेफड़ों में द्रव (फ्लूइड) जमा होने लगता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को लगातार खांसी, खखार, सांस लेने में परेशानी या बुखार हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। झोला छाप डॉक्टरों से बचें क्योंकि गलत इलाज स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
- बचाव के उपाय
- बच्चों को ठंड से पूरी तरह बचाएं, गर्म कपड़े जरूर पहनाएं।
- पौष्टिक और ताजा भोजन दें।
- दोपहर में मौसमी फल खिलाएं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
- घर में स्वच्छता बनाए रखें और बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रखें।