- आईएलएस और आधुनिक रनवे लाइटिंग से लैस है नोएडा एयरपोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विमान सेवाएं शुरू होने के बाद यह पहली सर्दी है। ऐसे में कोहरे के दौरान कम दृश्यता में विमानों की लैंडिंग और उड़ान संचालन की तैयारियों की परीक्षा होगी। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और आधुनिक रनवे लाइटिंग जैसी तकनीकी सुविधाएं मौजूद हैं। इनकी मदद से कम दृश्यता में विमानों के सुरक्षित संचालन में सहायता मिलेगी। हालांकि, घने कोहरे में उड़ानों का संचालन मौसम की स्थिति और निर्धारित सुरक्षा मानकों पर निर्भर करेगा।
एयरपोर्ट पर 3900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है। इसे आईएलएस और एयरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम से लैस किया गया है। आईएलएस पायलट को रनवे की दिशा और विमान को नीचे उतारने के सही मार्ग के बारे में संकेत देता है। इससे कम दृश्यता के दौरान कॉकपिट में लगे उपकरणों की मदद से विमान को रनवे की ओर लाने में सहायता मिलती है। वहीं, रनवे और अप्रोच लाइटिंग लैंडिंग के दौरान जरूरी दृश्य संकेत उपलब्ध कराती है।
तकनीक के साथ सुरक्षा मानकों का पालन भी जरूरी
कोहरे में उड़ानों का सुरक्षित संचालन केवल एयरपोर्ट पर उपलब्ध तकनीक पर निर्भर नहीं करता। विमान में लगे उपकरण, पायलट का प्रशिक्षण, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की प्रक्रियाएं और उस समय मौसम की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती हैं। कम दृश्यता के दौरान इन सभी व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। दृश्यता निर्धारित सीमा से कम होने पर तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उड़ानों में देरी या उन्हें दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करने की स्थिति बन सकती है।
नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से 15 जून 2026 को नियमित व्यावसायिक उड़ान सेवाएं शुरू हुई थीं। ऐसे में आगामी सर्दियों में कम दृश्यता के दौरान एयरपोर्ट की परिचालन व्यवस्थाओं की वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षा होगी। यात्रियों की सुविधा और उड़ानों की सुरक्षा के लिहाज से मौसम के अनुरूप संचालन तथा निर्धारित मानकों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।