सिरसा। नकली कीटनाशकों की रोकथाम गेहूं के सीजन से पहले ही कृषि विभाग ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले साल जहां 439 खाद और कीटनाशक के सैंपल लिए गए थे। इस बार अब तब 274 सैंपल लिए जा चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर कीटनाशक की दुकानों के साथ-साथ इस बार उत्पादन इकाइयों की भी जांच की जा रही है।
इनके बड़े स्तर पर सैंपल भरे जा रहे हैं, ताकि कीटनाशक की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। किसानों को कंपनियां से निम्न स्तर का कीटनाशक फसलों के लिए प्राप्त नहीं हो। अमूमन किसानों की शिकायत प्राप्त होती है कि पेस्टीसाइड की गुणवत्ता बेहतर नहीं थी और फसलों को नुकसान हुआ है।
किसानों की इन शिकायतों को मुख्यालय स्तर पर गंभीरता से लिया गया है। इसी कड़ी में सिरसा में कीटनाशक की इंडस्ट्री के सैंपल भरे गए। विशेष रूप से सीआईएल फरीदाबाद से असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. रमना बी कालूगी सिरसा पहुंचे। कृषि विभाग की टीम के साथ उन्होंने जांच की और सात सैंपल भरवाए। उन्होंने बताया कि ये डायरेक्टर जनरल हरियाणा के आदेशों पर की जा रही है, जो निरंतर प्रदेश में जारी रहेगी। आंकड़ों के अनुसार उच्च स्तरीय व कृषि विभाग की स्थानीय टीम मिलकर अब तक 21 सैंपल ले चुकी हैं, जिनकी जांच चल रही है।
यह जानना जरूरी है
सिरसा में कुल कीटनाशक उत्पादन इकाई - 3
खाद उत्पादन इकाई - 8
इस प्रकार है सैंपल कार्रवाई की स्थिति
वर्ष 2024 में कुल सैंपल - 439
कीटनाशक - 259
फेल - 18
खाद - 180
फेल - 33
कार्रवाई - तीन लाइसेंस रद्द और 12 सस्पेंड
वर्ष 2025 में कुल सैंपल - 274
कीटनाशक - 132
फेल - 4
खाद - 142
फेल - 8
कार्रवाई - एक लाइसेंस रद्द व 11 सस्पेंड
टीम ने इस प्रकार की जांच
कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अमित कुमार ने बताया कि इंडस्ट्री और दुकानों दोनों की जांच की जा रही है। उच्च स्तरीय टीम की ओर से सिरसा की दो इंडस्ट्री के दस्तावेज की जांच की गई थी। इसमें कीटनाशक लाइसेंस, उत्पादन इकाई संबंधी दस्तावेज, पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड का लाइसेंस, सिंचाई विभाग सहित अन्य विभागों की अनुमति पत्रों की जांच की गई है। पूरी यूनिट का निरीक्षण किया गया और जहां पर कुछ छोटी छोटी खामियां नजर आईं, उन्हें दुरुस्त करवाने के आदेश दिए गए हैं।