शिक्षिकाओं का आरोप है कि स्कूल की ओर से कहा गया था कि स्कूल पर नोएडा प्राधिकरण का करोड़ों रुपये बकाया है, इसलिए स्कूल प्राधिकरण में पैसे जमा करने के नाम पर शिक्षिकाओं के वेतन से नगद पैसे लिए जाते थे। लेकिन यह पैसे कभी प्राधिकरण में जमा नहीं कराए गए। इसका अंदाजा तब हुआ जब स्कूल ने एक कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा, जिसमें लिखा था कि शिक्षिकाओं ने कैश में वेतन नहीं लौटाया है। जब शिक्षिकाओं ने इसका विरोध किया तो स्कूल से निकालने की धमकी दी जाने लगी। इसको लेकर अक्टूबर 2024 में शिक्षिकाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी।
उसी आधार पर जिलाधिकारी ने सिटी मैजिस्ट्रेट, डिप्टी रजिस्ट्रार और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। शिक्षिकाओं ने जांच समिति को सभी सबूत उपलब्ध कराए। इसको लेकर तीन बार मीटिंग भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है।
जांच समिति की पहली मीटिंग के दौरान साफ कहा गया था कि शिक्षिकाओं को स्कूल से नहीं निकाला जाएगा। फिर भी विरोध करने वाली 11 शिक्षिकाओं को निष्कासित कर दिया गया। कुछ शिक्षिकाओं को जबरदस्ती स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया गया। इसको लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में हमें धरने पर बैठना पड़ा। यह धरना तीन दिन तक चलेगा। हमारी मांग है कि अध्यक्ष और प्रिंसिपल को भी हटाया जाए।
स्कूल मैनेजमेंट ने सोच समझकर यह कदम उठाया है। इसके लिए डिस्पेंसरी कमेटी बैठी है पूरी जांच के बाद यह निर्णय लिया गया।
-मोहिनी नेगी, प्रिंसिपल, उत्तराखंड पब्लिक स्कूल