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Noida News: मोबाइल पर लंबी बात बन सकती है ब्रेन ट्यूमर की वजह

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नोट - विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस पार्ट -1
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- समय पर जांच और उपचार से बचाई जा सकती है मरीजों की जान, विशेषज्ञों ने जागरूक रहने की दी सलाह



संवाद न्यूज एजेंसी

ग्रेटर नोएडा। यदि किसी व्यक्ति के सिर में लगातार तेज दर्द, धुंधला दिखाई देना, शरीर का संतुलन बिगड़ना और बार-बार उल्टी आने जैसी दिक्कतें हो रही है, तो ये लक्षण ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। वहीं, मोबाइल पर अधिक समय तक बात करते रहना भी ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी का बड़ा कारण बनता जा रहा हैं। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना और उससे निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से ब्रेन प्रभावित हो रहा है।



आज के दौर में मोबाइल फोन लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। कामकाज, पढ़ाई और सामाजिक संपर्क से लेकर मनोरंजन तक, हर क्षेत्र में मोबाइल का उपयोग बढ़ा है। ऐसे में लंबे समय तक मोबाइल फोन के इस्तेमाल और उससे निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से दिमाग प्रभावित होता है। ऐसे में मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर सावधानी बरतना और अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बातचीत करने से बचना बेहतर है।
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8 जून को हर वर्ष विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता हैं। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आतमप्रीत सिंह ने बताया कि लोगों को किसी भी तरह के असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि लंबे समय तक सिर में तेज दर्द बना रहे, नजर धुंधली होने लगे, बिना किसी स्पष्ट कारण के चक्कर आएं या शरीर का संतुलन बनाए रखने में कठिनाई महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि के कारण विकसित होता है। शुरुआती अवस्था में इसकी पहचान हो जाने पर उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। आधुनिक चिकित्सा तकनीक एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य उन्नत जांचों के जरिए ट्यूमर की स्थिति और आकार का पता लगाया जाता है। उनका कहना है कि जरूरत से ज्यादा मोबाइल पर बातचीत करने से बचना चाहिए। इसके अलावा सोते समय मोबाइल फोन को सिर के पास रखने के बजाय कुछ दूरी पर रखना चाहिए। ब्रेन ट्यूमर के सबसे सामान्य लक्षणों में लगातार सिरदर्द, दृष्टि संबंधी परेशानी, सुनने में दिक्कत, बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, संतुलन बनाने में परेशानी, भूलने की आदत बढ़ना और दौरे पड़ना शामिल हैं। कई मामलों में मरीजों को सुबह के समय सिरदर्द अधिक महसूस होता है।

जिम्स में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं, गंभीर मरीजों को करना पड़ता है रेफर

- ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं होने से मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर करना होता। जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि ब्रेन संबंधी समस्याओं को लेकर आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल में सामान्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं वाले मरीजों का उपचार उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता है।
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उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने शासन स्तर पर न्यूरोलॉजिस्ट की नियुक्ति की मांग हुई है। विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती होने से क्षेत्र के मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिल सकेगा तथा रेफरल की आवश्यकता भी कम होगी।

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