अब्दुल रहमान अयोध्या के मजनाई का रहने वाला है। वह ई-रिक्शा चलाता था और पिता की चिकन की दुकान को संभालता था। अब्दुल रहमान शुरू में अपनी अम्मी के मोबाइल पर यू-ट्यूब व फेसबुक चलाता था। इसी दौरान वह तालीबान, इस्लामिक स्टेट के वीडियो व दुनिया में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के वीडियो देखने लगा।
बंदूक बनाकर फोटो इंस्टाग्राम पर डालता था
वीडियो देखकर अब्दुल को भी बंदूक बनाने का शौक लग गया। वह लकड़ी व लोहे की नकली बंदूक बनाकर इंस्टाग्राम पर फोटो व वीडियो बनाने लगा था। सबसे पहले उसने ar_rahman नाम से इंस्टाग्राम पर आईडी बनाई जो ब्लॉक हो गई। बाद में कई नई आईडी बनाई और वो ब्लॉक होती रहीं।
सलाम का मैसेज आया और फिर हुआ ब्रेनवॉश
साल 2023 के दौरान अब्दुल को उसकी इंस्टाग्राम आईडी Abu_ubaida पर Altaf नाम से बनी आईडी से सलाम का मैसेज आया और इनमें बात होने लगी। उसने जिहाद के बारे में बताया और ब्रेन वॉश करना शुरू कर दिया। आरोपी ने खुद को इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरासान से बताया और जिहाद के लिए उकसाने करने लगा। उसी ने टेलीग्राम डाउनलोड करवाकर वहां बात करने लगा। उसने अपना नाम अबू सूफियान बताया। अपने संगठन के प्रति अब्दुल रहमान को समर्पित करने के लिए झंडा बनाने व वीडियो देखकर स्पीच देते हुए वीडियो बनाकर देने को कहा।
वीडियो व लोकेशन भेजकर हैंड ग्रेनेड तक पहुंचाया
दो मार्च 2025 की सुबह लगभग छह बजे दिल्ली आकर अब्दुल रहमान ऑटो पकड़कर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से निजामुद्दीन मरकज गया। यहां से उसे फरीदाबाद भेजा गया। ओला बाइक टैक्सी लेकर अब्दुल रहमान फरीदाबाद ओल्ड मेट्रो स्टेशन आया। यहां पर उसे हैंड ग्रेनेड की लोकेशन मिली तो ये ऑटो पकड़कर पाली गांव पहुंचा। फिर उस कमरे से इसने मिट्टी में दबे हैंड ग्रेनेड व अन्य सामान निकाले और लेकर निकला ही था कि एटीएस व एसटीएफ टीम ने पकड़ लिया। एसटीएफ जुलाई महीने में जांच पूरी कर चालान पेश कर चुकी है जिसमें कुल 46 गवाह बनाए गए हैं।