नोएडा। वर्ष 1978 में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रहे सेक्टर-15ए निवासी सेवानिवृत्त आईएएस सुशील चंद्र त्रिपाठी का कैलाश अस्पताल में कोरोना संक्रमण से बुधवार को निधन हो गया। वर्ष 1976 में नोएडा की स्थापना के बाद शासन ने उनको वर्ष 1978 में सीईओ बनाकर भेजा था। इससे पहले वर्ष 1976 में नोएडा की स्थापना के समय बुलंदशहर के तत्कालीन जिलाधिकारी धीरेंद्र मोहन मिश्रा को नोएडा के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। नोएडा के विकास का खाका सबसे पहले इन्होंने ही खींचा था।
बताया जाता है कि शासन की ओर से नोएडा के सीईओ पद के लिए बाकायदा पहली नियुक्ति सुशील चंद्र त्रिपाठी की ही हुई थी। हालांकि, नोएडा को बसाने का फैसला कांग्रेस ने लिया था। वर्ष 1977 में एक बार ऐसा भी समय आया, जब केंद्र में कुछ समय के लिए सरकार बदल गई। ऐसे में इस फैसले को बदलने के बारे में सोचा जाने लगा। उस वक्त यह विकल्प दिया गया था कि नोएडा के किसानों की जमीन को वापस कर दिया जाए या साहिबाबाद की तर्ज पर बसाया जाए। नोएडा में डेयरी फॉर्म तक बनाने की बात सोची गई थी, लेकिन सुशील चंद्र त्रिपाठी ने नोएडा को लेकर अलग सपना देखा था।
शहर को बसाने के लिए सरकार की ओर से रिवॉल्विंग फंड के तौर पर कुछ राशि देकर सरकार ने और सहायता देने से मनाकर दिया था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सेक्टर-12 में एलआईजी और एमआईजी फ्लैटों की स्कीम लेकर आए। उन्होंने सेक्टर-16 में डीटीसी का डिपो भी दिया। करीब डेढ़ से दो वर्ष तक पद पर रहने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई प्रमुख पदों पर सेवा दी। उन्होंने केंद्र सरकार के मंत्रालयों में भी अपना अहम योगदान दिया था। नोएडा लोकमंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और शिक्षा के प्रोजेक्ट चेयरमैन भी रहे। वह फोनरवा के संरक्षक भी थे।
नोएडा प्राधिकरण ने शोक व्यक्त किया
सुशील चंद्र त्रिपाठी के निधन पर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों ने शोक व्यक्त किया है। सीईओ रितु माहेश्वरी, एसीईओ, ओएसडी समेत सभी कर्मचारियों ने दुख व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके अलावा महामारी में मृत अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों व उनके परिजनों के निधन पर भी शोक व्यक्त किया।