मांडीखेड़ा गांव में बना सुल्तान काबूस बिन सईद अस्पताल।
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नूंह/नगीना। ओमान के सुल्तान काबूस बिन सईद के निधन पर पीएम मोदी सहित देश के तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने जहां शोक व्यक्त किया है वहीं मेवात में भी मातम का माहौल है। मेवात के लोगों से ओमान के दिवंगत सुल्तान का गहरा नाता रहा है। इसका कारण यह है कि सन 1996 में बाढ़ के बाद मेवात क्षेत्र में फैली महामारी से 5000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, तब ओमान ही वह देश था जिसने लोगों की जानें बचाने के लिए उस वक्त 12 करोड़ रुपये की भारी भरकम मदद भारत सरकार को दी थी। ओमान के सुल्तान काबूस बिन सईद ने मेवात के लोगों के इलाज के लिए 1997 में अपने देश के राजदूतों को भेजकर काबूस बिन सईद अस्पताल, जो अब अल-आफिया अस्पताल के नाम से जाना जाता है, की नींव मांडीखेडा में रखवाई थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्तूबर 1997 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने मांडीखेड़ा गांव में पहुंचकर हरियाणा प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के साथ करोड़ों की लागत से ओमान की सहायता से सुल्तान काबूस बिन सईद अस्पताल की आधारशिला रखी। इसमें ओमान के तत्कालीन राजदूत मोहम्मद ताहिर अलवी एदीद भी शामिल हुए थे।
ओमान के सुल्तान की मौत पर मेवात में शोक की लहर है, लोगों ने एक श्रद्धांजलि सभा करने का एलान भी किया है। दरअसल, शुक्रवार रात्रि 79 वर्षीय सुल्तान का ओमान के एक अस्पताल में निधन हो गया था। पूर्व सांसद चौधरी खुर्शीद अहमद बताते हैं कि उन दिनों वे तिवारी कांग्रेस से विधायक थे, बाढ़ के दौरान मेवात में फैली महामारी पर प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से मिले और उनका नगीना दौरा करवाया तथा एक अस्पताल का ऐलान भी हुआ। तब गुड़गांव जिला हुआ करता था।
वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक फजरुदीन बेसर बताते हैं कि उस दौरान फैली महामारी में 5000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। यह बात देश दुनिया में फैल गई तब ओमान ने 12 करोड़ रुपये की मदद दी थी। एक शिष्टमंडल प्रधानमंत्री से भी मिला था। 2003 में साल काबूस बिन सईद अस्पताल बनकर तैयार हुआ था। 2008 में दादरी के पास एक विमान हादसे में ओमान के सुल्तान की बेटी अलआफिया की मौत हो गई थी उसी के नाम पर अस्पताल का नाम बाद में रख दिया गया था। पूर्व चेयरमैन उस्मान दुर्रानी मांडीखेड़ा व शिक्षाविद अब्दुल वहाब, पूर्व मैनेजर चौधरी असगर गोरवाल ने बताया कि 18 एकड़ जमीन ग्राम पंचायत ने मुफ्त में तब अस्पताल बनाने के लिए दी थी।