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सुदीक्षा पार्ट टाइम जॉब कर घर भेजती थी 50 हजार रुपये, मां बोली मेरी बेटी नहीं बेटा थी वो

Thu, 13 Aug 2020 01:15 AM IST
नोएडा ब्यूरो नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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सुदीक्षा की मां रोते हुए - फोटो : अमर उजाला
गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुदीक्षा ने पढ़ने के साथ-साथ घर की जिम्मेदारी भी उठा रही थी। बैब्सन कॉलेज में पढ़ने के साथ ही सुदीक्षा अमेरिका की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में पार्ट टाइम जॉब करती थी। रोजाना कुछ घंटे काम करने के बाद उसे अच्छे पैसे मिल जाते थे। मामा सुमित ने बताया कि वह करीब 50 हजार रुपये कमा रही थी।
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बच्चियों को पढ़ाती थी सुदीक्षा - फोटो : अमर उजाला
उसके पैसे से ही पिता ने गांव से बाहर दूसरे घर का निर्माण कराया है। वहीं, पर पिता की दुकान है। सुदीक्षा घर और अपने भाई-बहन की पढ़ाई का खर्च उठाने में भी मदद कर रही थी। सुदीक्षा की मां ने बताया कि दूसरों को बेटा सहारा देता है, लेकिन मेरी बेटी, मेरा बेटा थी। उसने मुझे सहारा दिया था। अब मेरे पास कोई सहारा नहीं है।
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सुदीक्षा भाटी - फोटो : अमर उजाला
वह पढ़ना बंद नहीं करती थी। घर की पूरी जिम्मेदारी संभाल रखी थी। पिता की हर तरह से मदद करती थी। वह मेरा बेटा थी, लेकिन मुझे कौन संभालेगा। रोते हुए मां ने कहा कि जिनकी वजह से मेरी बेटी गई है। उनको कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्हें केवल न्याय चाहिए।

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सुदीक्षा भाटी की बचपन की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
सुदीक्षा के जाने से माता-पिता के साथ-साथ भाई-बहन भी काफी दुखी हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अब उसकी कमी कैसे पूरी होगी। वहीं, बुधवार को भी घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ था। सभी की आंखें नम थीं। इस दौरान सुदीक्षा की मां की कई बार तबीयत बिगड़ गई। उन्हें आराम कराया गया।
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सुदीक्षा भाटी - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान व मथुरा की दोस्त भी मौत से दुखी
कॉलेज में सुदीक्षा के दोस्तों में मथुरा और पाकिस्तान की एक-एक छात्रा भी शामिल है। मथुरा की दोस्त हेमलता को सबसे पहले सुदीक्षा की मौत की जानकारी मिली थी। हेमलता ने पाकिस्तान वाली दोस्त को फोन पर जानकारी दी। उसके बाद अमेरिका के बैब्सन कॉलेज तक जानकारी पहुंच गई। सुदीक्षा की मौत की सूचना मिलने के बाद से दोस्त काफी दुखी हैं। सुदीक्षा के मामा का कहना है कि तीनों बहुत अच्छी दोस्त थीं। रोजाना फोन पर बात करती थीं। कॉलेज में एक साथ रहती थीं।
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