छात्रा कोमल, सलोनी, प्रिशु, शिवानी, मुस्कान सरोज, गुड़िया प्रजापति और सूर्यकली का आरोप है कि एएनएम द्वितीय वर्ष (सत्र 2024-25) का नामांकन अब तक नहीं कराया गया। संस्थान बिना मान्यता के संचालित हो रहा है। प्रथम वर्ष में कुछ का नामांकन नोएडा स्थित कैलाश इंस्टीट्यूट और जौनपुर के माता पन्नाधाय इंस्टीट्यूट में दिखाया गया था, लेकिन द्वितीय वर्ष की फीस संबंधित कॉलेजों में जमा नहीं की गई। छात्राओं के अनुसार वास्तविक फीस बस 40 हजार रुपये प्रतिवर्ष है, जबकि संस्थान ने 80 हजार से एक लाख रुपये तक वसूले। अतिरिक्त राशि भी वापस नहीं की गई।
फीस के लिए कॉलेज कर्मचारियों ने सीधे छात्राओं से संपर्क किया, जिसपर एआईपीएस की ओर से छात्राओं को धमकाया और भ्रमित किया गया। छात्राओं के अनुसार, परीक्षा से एक दिन पहले तक प्रवेशपत्र तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों खतरे में पड़ गए। एबीवीपी पदाधिकारियों ने कहा कि संस्थान ने नियमों की अनदेखी की है। छात्राओं का आर्थिक शोषण भी किया है। परिषद की मांग है कि जमा की गई पूरी फीस वापस कराई जाए। सभी छात्राओं का नामांकन मान्यता प्राप्त कॉलेजों में सुनिश्चित हो।
एबीवीपी ने दी आंदोलन की चेतावनी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन में मांग की गई कि जिले में सक्रिय सभी फर्जी संस्थानों की पहचान कर उन्हें तत्काल बंद कराया जाए, ताकि किसी अन्य विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो।
बिना मान्यता संचालित हो रहा था पैरामेडिकल संस्थान
पैरामेडिकल कॉलेज के मामले ने शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि पैरामेडिकल संस्थान खोलने के लिए राज्य चिकित्सा संकाय या इंडियन नर्सिंग काउंसिल से मान्यता अनिवार्य है। इसके बाद संबंधित विश्वविद्यालय या बोर्ड से संबद्धता मिलती है। मान्यता के लिए कॉलेज में मानक भवन, लैब, हॉस्टल, पुस्तकालय, प्रशिक्षित फैकल्टी और संबद्ध अस्पताल होना जरूरी है। ऐसे में जिन संस्थानों में ये व्यवस्थाएं न हों, उन्हें किसी हाल में अनुमति नहीं मिलती। यहां जिस कॉलेज के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है उसकी न तो खुद की बिल्डिंग थी, न लैब और न ही पंजीकृत फैकल्टी। इसके बावजूद छात्राओं का दाखिला कराया गया और लाखों रुपये वसूले गए।
पुलिस की पकड़ से दूर छह आरोपी, तलाश करने का दावा
छात्राओं से ठगी में शामिल छह आरोपियों तक अभी पुलिस नहीं पहुंच पाई है। पुलिस का दावा है कि आराेपियों की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। सोमवार को केस दर्ज कर संचालक प्रिंस उर्फ आजम खां, प्राचार्य विवेक श्रीवास्तव और सहयोगी आयुष को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। शैलेंद्र मौर्य, विजय मौर्य, बृजेश, दिलीप बाजपेयी, रेहान खान और आलीशान की तलाश अभी पूरी नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार भागे हुए आरोपियों को किसी बड़े नेता का संरक्षण प्राप्त है। इसीलिए गिरफ्तारी में देरी हो रही है।
छात्राओं का दावा, प्रिंस और दिलीप फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड
छात्राओं से ठगी मामले में नौ आरोपियों में दो चेहरे सबसे अहम बताए जा रहे हैं। इनमें प्रिंस उर्फ आजम खां और दिलीप बाजपेयी पर्दे के पीछे से पूरे नेटवर्क का संचालन करते थे। छात्राओं का कहना है कि अधिकतर विद्यार्थियों ने इन दोनों को कभी देखा ही नहीं।
छात्रा कोमल, शिवानी, मुस्कान, गुड़िया ने बताया कि संस्थान में प्रिंस हमेशा मास्क लगाकर आता था, जिसके चलते बहुत कम विद्यार्थी उसे पहचानते थे। दिलीप भी सीधे विद्यार्थियों से नहीं मिलता था। संस्थान तक छात्रों को लाने और लालच देकर फंसाने का काम दूसरे लोग करते थे। आगे की पूरी डील और बातचीत प्राचार्य विवेक श्रीवास्तव करता था। इसी कारण छात्रओं की सीधी पहुंच प्रिंश और दिलीप तक नहीं हो पाती थी। गिरफ्तारी के बाद कई छात्राओं ने पहली बार प्रिंश को देखा। दिलीप अब भी उनके लिए अनजान चेहरा है।