- ग्रेटर नोएडा व ग्रेनो वेस्ट की सोसाइटियों के लोगों ने खुशी की लहर
- पशु प्रेमी बोले,व्यवस्था की विफलता छिपाने का प्रयास
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। लावारिस कुत्तों के बढ़ते हमलों और मासूमों की जान जाने की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ग्रेटर नोएडा व ग्रेनो वेस्ट के लोगों ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि कुत्तों के आतंक के कारण कई बच्चे खेलना तक भूल चुके हैं। कई लोगों को कुत्तों ने इतना गंभीर रुप से घायल किया है कि वह डर के मारे अब बाहर तक नहीं निकलते हैं। इसके साथ ही कुत्तों के काटने की घटना से सोसाइटियों में कई बार गंभीर लड़ाई तक हो चुकी हैं। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 के अपने आदेश में किसी भी तरह का बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसमें सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने कहा कि वह जमीन पर दिख रही कठोर सच्चाइयों से अनजान नहीं रह सकती। छोटे बच्चों को नोचे जाने, बुजुर्गों पर जानलेवा हमलों और यहां तक कि विदेशी पर्यटकों के प्रभावित होने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कोर्ट ने इसे जन सुरक्षा के लिए एक गंभीर आपातकाल माना है।
निवासियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश कुत्तों से सुरक्षा देगा। लावारिस कुत्तों के आतंक के कारण लाखों लोग हर साल पीड़ित रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार,जनवरी से अप्रैल तक 61 हजार लोगों को कुत्ते काट चुके हैं। वहीं पशु प्रेमियों का कहना है कि जब स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय वर्षों तक प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रहे, तब अचानक सड़कों के बेजुबान जानवरों को समस्या घोषित कर देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
आवारा पशुओं को हटाना आसान बयानबाजी हो सकती है, लेकिन असली जिम्मेदारी प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की है। बेजुबान जानवरों को बलि का बकरा बनाना सभ्य समाज का समाधान नहीं है।
- कावेरी राणा,पशु प्रेमी
यह निर्णय समस्या का स्थायी समाधान नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक विफलताओं को ढकने का प्रयास प्रतीत होता है।
-सोनू कुमार,पशु प्रेमी
सुप्रीम कोर्ट ने लावारिस कुत्तों के ऊपर आज अपने पुराने दिए हुए फैसले को वापस लेने से इनकार किया है। उससे आम लोगों को बहुत ही खुशी हो रही है तथा तथाकथित पशु प्रेमी गैंग के लिए तमाचा है।
- दीपाकंर कुमार,नेफोवा
लावारिस कुत्तों के आतंक से लोग काफी परेशान हैं। उन्हें शेल्टर होम में भेजा जाना बेहद जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य कदम है।
- रोहित मिश्रा, निवासी