नलगढ़ा में ही 1929 में दिल्ली असेंबली में बम फेंकने की योजना शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु व अन्य ने बनाई थी। योजना बनाने के बाद भगत सिंह दोनों साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ नाव से यमुना पार करते हुए दिल्ली पहुंचे थे।
नोएडा की धरती 18वीं शताब्दी की धरोहर को संजोए है। यहां के स्मारक स्थल, पत्थर व चित्र इतिहास की गवाही देते हैं। बम बनाने के लिए बारूद पीसने में भगत सिंह व उनके साथियों ने जिस पत्थर का प्रयोग था, वह आज भी यहां के गुरुद्वारे में संरक्षित है।
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शहर के सेक्टर-145 स्थित नलगढ़ा गांव में गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी हरविंदर सिंह ने बताया कि नलगढ़ा में ही 1929 में दिल्ली असेंबली में बम फेंकने की योजना शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु व अन्य ने बनाई थी। योजना बनाने के बाद भगत सिंह दोनों साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ नाव से यमुना पार करते हुए दिल्ली पहुंचे थे। आज भी भगत सिंह के साथी करनाल सिंह का परिवार सेक्टर-141 नलगढ़ा में रहता है।
सेक्टर-62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान के पूर्व कुलपति व पुरातत्व विभागाध्यक्ष डॉ. बुद्ध रश्मि मणि ने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से ब्रिटिश काल के दौरान यहां से चोरी करके विदेश ले जाई गईं बेशकीमती मूर्तियों को वापस लाया गया। मूर्तियों को संस्थान के संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। इनमें भगवान विष्णु के वाराह अवतार व अन्य मूर्ति शामिल हैं। कुछ समय बाद यह संग्रहालय आमजन के लिए भी खोल दिया जाएगा।
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1803 में हुआ था मराठा-ब्रिटिश का युद्ध
सेक्टर-38 स्थित गोल्फ कोर्स के कोच धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि यहां दिल्ली की गद्दी के लिए 1803 में ब्रिटिश और मराठा साम्राज्य के बीच युद्ध हुआ था। युद्ध की स्मृति में बना स्मारक यहां मौजूद है, जो गोल्फ कोर्स के 16वें होल के पास है।