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UP: STF ने चार GST चोरों को पकड़ा, मास्टरमाइंड दिल्ली का हरदीप, 100 करोड़ के अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

Fri, 09 Jan 2026 10:46 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने जीएसटी चोरी के एक बड़े संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ ने  जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। विभिन्न राज्यों और यूपी के कई जिलों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है।
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चारों आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) उत्तर प्रदेश ने जीएसटी चोरी के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ ने विभिन्न राज्यों और उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में बोगस फर्मों का पंजीकरण कर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी बोगस फर्मों के माध्यम से वास्तविक फर्मों को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) बेचते थे। इस प्रक्रिया में वास्तविक फर्मों द्वारा 30 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की गई, जबकि गिरोह द्वारा संचालित कुल लेन-देन से लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक की राजस्व क्षति प्रथम दृष्टया सामने आई है। 

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गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस (39) निवासी दिल्ली, जितेन्द्र झा (26) निवासी समस्तीपुर बिहार, पुनीत अग्रवाल (26) निवासी पश्चिम दिल्ली और शिवम (25) निवासी विजय एन्क्लेव नई दिल्ली के रूप में हुई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड हरदीप सिंह है, जो नई दिल्ली में अकाउंटेंसी से जुड़े कार्य करता था और उसी की देखरेख में पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा था।

एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, नौ मोबाइल, तीन आधार कार्ड और 50,840 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बड़ी संख्या में ई-मेल आईडी, जीएसटी पोर्टल लॉग-इन डिटेल, बैंकिंग एप्स और अन्य डिजिटल साक्ष्य पाए गए हैं, एसटीएफ के अनुसार आरोपियों को शुक्रवार को  एसटीएफ फील्ड यूनिट नोएडा कार्यालय में पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले एसटीएफ की एक टीम 8 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और गाजियाबाद से जानकारी की थी। सूचना मिली थी कि दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में एक संगठित गिरोह बोगस फर्मों के जरिए फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी कर रहा है।

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ऐसे चलता था पूरा खेल
पूछताछ में सामने आया कि हरदीप सिंह अपने सहयोगियों जितेन्द्र झा, पुनीत अग्रवाल, आलोक अग्रवाल और शिवम के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराता था। इन फर्मों के नाम पर बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के फर्जी सेल्स इनवॉइस तैयार किए जाते थे और उनके आधार पर फर्जी ई-वे बिल बनाकर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किए जाते थे। वास्तविक फर्मों के मालिक अपना जीएसटी नंबर, माल या सेवा का विवरण, मात्रा और कीमत की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से हरदीप सिंह को भेजते थे। इसके बाद गिरोह द्वारा बोगस फर्मों के नाम से इनवॉइस और ई-वे बिल जनरेट कर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया जाता था और संबंधित वास्तविक फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दिलाया जाता था।

बैंकिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग का लिया जा रहा था सहारा
फर्जी लेन-देन को वास्तविक दिखाने के लिए बोगस फर्मों और वास्तविक फर्मों के बीच बैंक खातों के माध्यम से धनराशि ट्रांसफर दिखाई जाती थी। इसके बाद उस राशि को कैश या सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए वापस निकाल लिया जाता था। अभियुक्तों के पास विभिन्न फर्मों की लॉग-इन आईडी, पासवर्ड और मोबाइल नंबर होते थे, जिससे वे ओटीपी प्राप्त कर आसानी से बैंक ट्रांजैक्शन और जीएसटी रिटर्न फाइलिंग कर लेते थे।

कई राज्यों में फैला है नेटवर्क
एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि अभियुक्तों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यों के पते पर दर्जनों बोगस फर्में पंजीकृत कराई थीं। मोबाइल फोन की जांच में 30 से अधिक ई-मेल आईडी मिली हैं। जिनका उपयोग बोगस फर्मों के पंजीकरण, फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल बनाने, जीएसटी रिटर्न फाइल करने और बैंकिंग ओटीपी प्राप्त करने में किया जाता था।
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पहले से दर्ज मामलों से कनेक्शन
इस गिरोह के खिलाफ जीएसटी विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहले से कई अभियोग पंजीकृत कराए गए हैं। इसी क्रम में थाना कविनगर सिटी जोन, गाजियाबाद में पंजीकृत संबंधित विवेचना में एसटीएफ से तकनीकी और अभियानी सहयोग मांगा गया था। महेश इंटरप्राइजेज नामक फर्म से जुड़े इस मामले के अनावरण में एसटीएफ की भूमिका अहम रही। एसटीएफ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले की आगे की विवेचना स्थानीय विवेचक द्वारा की जा रही है। जबकि एसटीएफ तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण में सहयोग जारी रखेगी। जांच के दौरान और भी बोगस फर्मों, लाभार्थी वास्तविक फर्मों तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। 
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