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Noida News: एल्डिको आमंत्रण एओए विवाद में डिप्टी रजिस्ट्रार के फैसले पर रोक

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निखिल।सिंघल
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, मुख्य वित्तीय अधिकार छीनकर दैनिक खर्चों तक किया था सीमित
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एओए चुनाव के नियमों में संशोधन के लिए निवासियों से सुझाव मांगने को कहा
नोएडा (संवाद)। सेक्टर-119 स्थित एल्डिको आमंत्रण अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) के चुनाव के विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेश पर रोक लगा दी। इसके जरिये सोसाइटी के पदाधिकारियों के मुख्य वित्तीय अधिकार छीनकर उन्हें सिर्फ दैनिक खर्चों तक सीमित कर दिया गया था। अब पुरानी एओए ही हैंडओवर संभालेगी। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और डिप्टी रजिस्ट्रार को एओए चुनाव के नियमों के संशोधन के लिए सभी एओए से सुझाव मांगने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।

इस विवाद की शुरुआत सोसाइटी में 29 मार्च 2026 को हुए चुनावों से हुई थी। आरोप है कि चुनाव अधिकारी ने नतीजों का एलान भी नहीं किया फिर भी डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय ने दूसरे पक्ष की सूची को अस्थायी (प्रोविजनल) मंजूरी दे दी और 20 अप्रैल 2026 को मौजूदा कमेटी के अधिकारों पर पाबंदी लगा दी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि कानून में ऐसी किसी अस्थायी मंजूरी का कोई नियम ही नहीं है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सोसाइटियों के कामकाज पर कई बड़े सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुसार पदाधिकारियों का कार्यकाल 1 साल का होता है और कोई भी व्यक्ति लगातार 2 साल से अधिक पद पर नहीं रह सकता है। इस मामले में नोएडा हाईराइज फेडरेशन के अध्यक्ष निखिल सिंघल ने याचिका दायर की थी।
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अदालत ने मेंटेनेंस या बिजली बिल बकाया के नाम पर निवासियों से वोट देने का हक छीनने की प्रथा पर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट का मानना है कि इसका गलत इस्तेमाल करके चुनिंदा लोगों की वोटर लिस्ट तैयार कर ली जाती है। इसके अलावा नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ जैसे बड़े शहरों में सोसाइटियों के हजारों विवादों को निपटाने के लिए एसडीएम (एसडीएम) की जगह एक अलग और समर्पित विभाग या कोर्ट बनाने का सुझाव दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (संस्थागत वित्त) और रजिस्ट्रार से इन सभी मुद्दों पर हलफनामा मांगा है। साथ ही आदेश दिया है कि इस फैसले को सभी सोसाइटियों के नोटिस बोर्ड पर लगाया जाए ताकि आम निवासी भी अपने सुझाव कोर्ट को भेज सकें।

सोसाइटियों के नोटिस बोर्ड में कॉपी लगाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के डिप्टी रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र की सभी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों को ऑर्डर की कॉपी भेजकर नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से लगवाने के निर्देश दिए। फ्लैट मालिक, एओए सदस्य और समाज-सेवी लोग सोसाइटियों के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव या टिप्पणियां डिप्टी रजिस्ट्रार के माध्यम से, सीधे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजकर या कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दायर करके प्रस्तुत कर सकें।
मैं हाईकोर्ट के आदेश को हाउसिंग सोसाइटियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और अपार्टमेंट ओनर्स के लोकतंत्र अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानता हूं। -निखिल सिंघल, पूर्व एओए सदस्य
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हमारी सोसाइटी में वर्तमान में हुए चुनाव में धांधली की आरोप के बाद ये शुरू हुआ। यह शहर की विभिन्न सोसाइटियों के लिए एक उदाहरण है। हर सोसाइटियों के नोटिस बोर्ड पर यह फैसला लगाया जाएगा। -ऋषि पुरवार, उपाध्यक्ष
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