स्पोर्ट्स सिटी : प्लॉट के टुकड़े करने से पेच फंसा
- अलग-अलग शिड्यूल में पीएसी ने मांगी रिपोर्ट, नक्शे के मिलान के बाद रिपोर्ट बनाना मुश्किल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। लोक लेखा समिति (पीएसी) की ओर से नक्शे के मिलान के आधार पर नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के वर्तमान हालात की रिपोर्ट देना टेढ़ी खीर साबित होगा। पीएसी ने जिन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है उसके लिए प्राधिकरण के अधिकारी पूरा जोर लगा रहे हैं। लेकिन प्लॉट के टुकड़े करने से पेच फंस गया है। अब नक्शे और मौजूदा प्लॉट के हालात का मिलान मुश्किल होगा।
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने नोएडा प्राधिकरण के परफॉर्मेंस ऑडिट में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना पर कई सवाल उठाए हैं। इन्हीं आपत्तियों पर लखनऊ में पीएसी के सामने सुनवाई हो रही है। इसमें सबसे पहले स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के मामले को उठाया गया है। दो सुनवाई के बाद भी पीएसी उक्त परियोजना को ठीक से समझ नहीं पाई है। इसलिए बार-बार परियोजना की आंतरिक रिपोर्ट मांगी जा रही है। पहली बार प्राधिकरण के अधिकारी इसका पूरा ब्योरा लेकर नहीं गए थे। दूसरी बार भी कुछ ऐसा ही रहा।
यहां आएंगी प्राधिकरण के सामने मुश्किलें
स्पोर्ट्स सिटी में जब जमीन का आवंटन हुआ तो केवल चार डेवलपर्स थे। लेकिन बाद में जमीन के टुकड़े कर दिए गए और 45 डेवलपर्स में इसे बांट दिया गया। प्राधिकरण ने भी आंखें मूंदे रखीं। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिन चार डेवलपर्स को खेल सुविधाएं विकसित करनी थीं। उन सुविधाओं को इतने सारे बिल्डर कैसे विकसित करेंगे। कौन सा बिल्डर कौन सी खेल सुविधा विकसित करेगा। पीएसी ने इस पर पूरा ब्योरा मांगा है। हालात और भी मुश्किल इसलिए भी है कि बिल्डरों ने जिन खेल सुविधाओं के विकसित होने का हवाला बीते कुछ वर्ष पहले दिया था। वह स्थानीय स्तर के भी नहीं है। ऐसे में इस पर भी विवाद होगा कि कौन सी सुविधाएं पूरी हो चुकी हैं और कौन सी बाकी हैं।
कितनी जमीन खाली है और कितने पर हो चुका है निर्माण
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में नियम के मुताबिक 70 प्रतिशत क्षेत्र में खेल सुविधाएं और 30 प्रतिशत क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यिक, ग्रीन बेल्ट आदि बनाने थे। जब प्लॉट के टुकड़े नहीं किए गए थे तब तक तो स्थिति स्पष्ट थी। लेकिन अब जब प्लॉट के टुकड़े कर दिए गए हैं तो कौन सा बिल्डर अपनी जमीन के कितने प्रतिशत क्षेत्र में खेल सुविधाएं विकसित करेगा और कितने प्रतिशत क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग के फ्लैट बनाएगा। इसकी डिटेल स्पष्ट नहीं है। पीएसी को यह जानकारी चाहिए कि इनमें से कितनी जमीन पर निर्माण हुआ है और कितनी जमीन बाकी है। यह और भी मुश्किल है।
खेल सुविधाएं विकसित होने से पहले ही कुछ मामलों में मिली ओसी
प्राधिकरण ने खेल सुविधाएं विकसित होने से पहले ही कुछ मामलों में ओसी दे दी। हालांकि 2021 से इसे बंद कर दिया गया। यही नहीं कुछ मामलों में नक्शे को भी मंजूरी दे दी। यह सबकुछ सवालों के घेरे में है और इन सब पर प्राधिकरण को अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
स्पोर्ट्स सिटी फैक्ट फाइल :-
नोएडा प्राधिकरण ने 2010-11 में सेक्टर-78, 79, 101 और 150 के अलावा वर्ष 2014-15 में सेक्टर-150 और वर्ष 2015-16 में सेक्टर-152 में स्पोर्ट्स सिटी की योजना निकाली थी। सेक्टर-78, 79 व 101 में थ्री सी ग्रीन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 7.27 लाख वर्गमीटर, सेक्टर-150 में लॉजिक्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 8 लाख वर्गमीटर, सेक्टर-150 में थ्री सी ग्रीन डेवलपर्स स्पोर्ट्स सिटी प्राइवेट लिमिटेड को 12 लाख वर्गमीटर और सेक्टर-152 में एटीएस होम्स प्राइवेट लिमिटेड को 5 लाख वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया।