गूगल मैप का प्रयोग करने पर केंद्रीय विहार होते हुए हवालिया नाले से जो रास्ता कासना रोड की ओर जाता है। वह काफी संकरा और घुमावदार है। हवालिया नाले के हवालिया नाले में वाहन को गिरने से बचाने के लिए डाली गई मिट्टी। किनारे रेलिंग, जर्सी बैरियर, क्रैश वैरियर नहीं है। चालकों को सावधानी बरतते हुए निकला पड़ता है। यहां रोड समाप्त होने का चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगा है। यही कारण लोगों ने की खुले नाले को ढकवाने की मांग की।
एक्टिव सिटीजन टीम के हरेंद्र भाटी ने बताया कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सड़क किनारे कई नाले खुले हैं। जिससे आए दिन जान माल की हानि हो रही है। उन्होंने खुले नालों के आसपास वैरिकेड रखवाने और नाले ढकने की मांग की है।
दिल्ली निवासी स्टेशन मास्टर भारत सिंह ग्रेटर नोएडा होते हुए बंघोला की ओर बढ़े तो हवालिया नाले से पहले मुख्य सड़क समाप्त होने के बाद मैप पर नाले का साइन दिखाई नहीं दिया। इससे उनकी तेज रफ्तार कार सीधा 30 फीट गहराई में नाले में जा गिरी।
हादसे के बाद स्थानीय पुलिस की ओर से मोड़ के पास तीन बैरिकेड रखवाए गए थे। अमर उजाला ने खानापूर्ति के इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से मंगलवार को नाले से पहले मिट्टी का ढेर लगवाया गया है। इस मिट्टी के ढेर की ऊंचाई करीब चार फीट तक है। वहीं, पूरे नाले के रास्ते तक मिट्टी का ढेर लगवाने की बात कही गई है।
दो साल पहले हुई थी शादी
हादसे के दिन भारत सिंह शनिवार दोपहर ग्रेटर नोएडा के रानी रामपुर घंघोला के पास एक गांव में आयोजित एक शादी समारोह में जाने के लिए अपनी कार से निकले थे। भारत सिंह परिवार में सबसे छोटे थे। उनकी तीन बहने व दो भाई है। दो साल पहले उनकी शादी हुई थी। भाई का कहना है भाई ने गूगल मैप लगाया था इसकी कोई जानकारी नहीं है। हादसे के बाद से उनका मोबाइल नहीं मिला है।
गांव कम आने-जाने के कारण नेविगेशन का प्रयोग करने की आशंका
भारत सिंह अपने पैतृक गांव रानी रामपुर कम ही गांव आते-जाते थे। यही कारण था कि वह मानेसर से नेविगेशन का प्रयोग करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। आशंका है कि हादसे के समय कार तेज रफ्तार में थी, यही कारण रहा कि उन्हें नीले रंग का नहर-नाले रंग का हल्का साइन नहीं दिखाई दिया। उनकी कार हवालिया नाले में गिर गई थी। हादसे के वक्त वहां से गुजर रहे मृतक के दोस्त व डिलीवरी ब्वॉय निखिल ने बताया कि साथियों की मदद से दरवाजा खोलकर उन्हें बचाने का प्रयास किया। लेकिन दरवाजा लॉक होने के कारण उन्हें कामयाबी नहीं मिल पाई। सूचना पर पहुंची बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने क्रेन की मदद से उन्हें निकालकर यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।