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फसल अवशेष जलाने पर रहेगी विशेष निगरानी

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नूंह। जिले के किसानों से खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाने का आह्वान किया गया है। उन्हें बताया गया है कि इससे जहां गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति उत्पन्न होती है वहीं श्वास संबंधी रोग होने की आशंका रहती है। वहीं फसल अवशेष जलाने वालों पर नजर रखने के लिए ग्राम सचिवों और पटवारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
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कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से मृदा उर्वरता व उत्पादकता कम हो जाती है। मृदा का तापमान भी बढ़ जाता है, जिससे उसमें उपस्थित सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। भारी मात्रा में हानिकारक गैसें मिथेन, कार्बन डाई आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड आदि निकलती हैं। जिनसे प्रदूषण बढ़ने के साथ पृथ्वी का तापमान बढ़ता है। जिसके परिणाम स्वरूप जलवायु में परिवर्तन होते हैं। विषैली गैसों से कैंसर, अस्थमा एवं अन्य श्वास संबंधित रोग हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फसल अवशेष जलाने के मामलों को बेहद गंभीरता से लिया है। सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर फसल अवशेष जलाने के संबंध में निगरानी रखने को कहा गया है। पत्र के आधार पर जिले के सभी ग्राम सचिवों व पटवारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे कटाई सीजन के दौरान फसल अवशेष जलाने वालों पर नजर रखें। यदि कोई मामला संज्ञान में आता है तो 30 मिनट के भीतर उसकी सूचना दें। यदि संबंधित ग्राम सचिव अथवा पटवारी इस कार्य में विफल रहते हैं तो इसे ड्यूटी के प्रति घोर लापरवाही मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अवशेष का करें सदुपयोग
किसान फसलों के अवशेषों को मिट्टी को पलटने वाले हल से मिट्टी में मिला दें, इससे कार्बनिक क्षमता बढ़ेगी। फसलों के अवशेषों को स्ट्रा रीपर से भूसा बनाकर पशुओं के लिए भंडारण भी कर सकते हैं। अवशेषों को गोबर की खाद में मिलाकर वर्मी कंपोस्ट बना सकते हैं। बिजली बनाने वाली बायोमास कंपनी को बेच भी सकते हैं।
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