नई दिल्ली। मैं अपने पिता को स्कूटी पर अस्पताल लेकर गया और जान बचाने के लिए माथे पर तिलक लगाया। यह आपबीती उत्तरी घोंडा निवासी मोहम्मद साहिल ने बयान की। उसके पिता परवेज को दंगाइयों ने गोली मार दी थी जिससे उनकी मौत हो गई। साहिल बुधवार को अपने पिता का शव लेने के लिए जीटीबी अस्पताल में इंतजार करता रहा। उसने बताया कि पिता का शव मिलने के बाद वह उसे लेकर मुजफ्फरनगर जाएगा जहां उन्हें दफन किया जाएगा।
साहिल ने बताया कि उसके पिता परवेज आलम (50) अपना गैरेज चलाते थे। वह मंगलवार को दोनों समुदाय के लोगों को समझा बुझा रहे थे कि आपस में हिंसा न करें। इस दौरान वह दरवाजे के पास खड़े थे, तभी उनकी पीठ में गोली लगी। इसके बाद वह जमीन पर गिर गए।
हिंसा में अपने पिता को खो चुके साहिल ने बताया कि उसने गोलीबारी के बाद पुलिस तथा एंबुलेंस को फोन किया लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद वह पुलिस के पास गया लेकिन उसकी किसी ने मदद नहीं की। इसके बाद उसने पिता को जीटीबी अस्पताल ले जाने के लिए अपने मित्र से स्कूटी मांगी। गली में उपद्रवी दंगा कर रहे थे तो साहिल के मित्र ने उसके माथे पर तिलक लगा दिया ताकि वह दोनों दंगाइयों से बच सकें और परवेज आलम को अस्पताल पहुंचा सके। साहिल के पिता का बहुत खून बह गया था जिससे अस्पताल में उनकी मौत हो गई। उसके दोस्त ने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि पहले दोनों समुदायों के लोग शांति से रहते थे लेकिन नेताओं के भाषणों ने लोगों को भड़काया और उसके बाद ही दंगे हुए। लोग धर्म के नाम पर बांट रहे हैं और कुछ हमें पाकिस्तानी कह रहे हैं। मेरा जन्म इस धरती पर हुआ है और मैं यहीं मेरी मौत होगी। यह धरती मेरी मातृभूमि है।- एजेंसी