डीसीपी नोएडा हरीश चंदर ने बताया कि आरोपी सुपरटेक इको विलेज गोल्फ कंट्री के फ्लैट में रहते थे। जिसका किराया 25 हजार रुपये प्रतिमाह है। सभी आरोपी करीब आठ माह पहले दिल्ली से यहां शिफ्ट हुए थे। आरोपी बीते सात वर्षों से ठगी कर रहे थे। पुलिस से बचने के लिए एनसीआर के शहरों में लगातार अपना ठिकाना बदलते रहते थे। शुक्रवार को सेक्टर-20 पुलिस के पास आई ठगी की शिकायत के बाद नोएडा पुलिस की टीम सक्रिय हुई थी। जिसके बाद गिरोह के बदमाशों को पकड़ा जा सका। पुलिस आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप की जांच कर रही है।
शिक्षा और चिकित्सा वीजा पर आए थे आरोपी
एडीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी शिक्षा और चिकित्सा वीजा पर भारत आए थे। करीब छह माह बाद ही इनके वीजा की अवधि खत्म हो गई। इसके बाद भी आरोपी अपने देश नहीं लौटे।
पुर्तगाल, स्वीडन और नीदरलैंड की महिलाओं से भी की ठगी
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि आरोपी विभिन्न डेटिंग एप मसलन टिंडर, बंबल, ओके क्यूपीड और बाडो पर अपनी फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। आमतौर पर डॉक्टर, प्लास्टिक सर्जन या बिजनेसमैन बनकर भारत समेत पुर्तगाल, स्वीडन और नीदरलैंड मूल की महिलाओं से दोस्ती कर ठगी के जाल में फंसाते थे। बातचीत शुरू होने के बाद महंगे उपहार भेजने और मिलने आने की बात कहते थे। फिर कस्टम अधिकारी बनकर एयरपोर्ट पर पकड़े जाने और विदेशी करेंसी साथ होने की बात कहकर पैसे मंगाते थे। बातचीत को सरल बनाने के लिए गूगल ट्रांसलेटर की मदद लेते थे। भूटान निवासी महिला सहयोगी कभी कस्टम अधिकारी बनकर पैसे के लिए कॉल करती थी और खाते में पैसे ट्रांसफर कराती थी। इसके बाद इसे नाइजीरिया की मुद्रा नायरा में बदलवा कर अपने खातों में रकम ट्रांसफर करा लेते थे।