ऑनलाइन शॉपिंग की फर्जी वेबसाइट बना ठगी करने वाले गिरोह के छह गिरफ्तार
बिग बाजार, बिग बास्केट और डीमार्ट के नाम से फेसबुक पर सस्ते दामों पर बिक्री का देते थे विज्ञापन
एंड्रायड पैकेज किट से ग्राहकों के डेबिट, क्रेडिट कार्ड के सीवीवी, ओटीपी पता कर निकालते हैं रुपये
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिले की साइबर हेल्पलाइन टीम ने बिग बास्केट, बिग बाजार और डी-मार्ट की हू-ब-हू फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के छह बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गिरोह फर्जी वेबसाइट बनाकर सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर सस्ते दाम और अधिक छूट का झांसा देकर लोगों को जाल में फंसाता था। इसके बाद ऑनलाइन भुगतान के नाम पर एंड्रायड पैकेज किट (एपीके) फाइल भेजकर डेबिट-क्रेडिट कार्ड के नंबर, सीवीवी और ओटीपी हासिल कर उनके खातों से रुपये दूसरे खाते में हस्तांतरित कर देते हैं। गिरोह का सरगना ध्रुव पहले ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी में काम करता था। आरोपी एक दिन में लगभग एक लाख की ठगी कर लेते थे और लगभग एक साल से सक्रिय थे।
एसीपी साइबर क्राइम वर्णिका सिंह ने बताया कि साइबर हेल्पलाइन टीम को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो नामी शॉपिंग कंपनियों के नाम से वेबसाइट बनाकर लोगों को ठग रहा है। सूचना पर पुलिस ने गौड़ सिटी सेंटर मॉल के पास सर्विस रोड से आई-10 कार में सवार छह बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया।आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के एसोटेक सोसाइटी निवासी विनीत कुमार, ध्रुव सोलंकी, श्याम एंक्लेव निवासी गौरव तालान, बादलपुर छपरौला निवासी सलमान, संतोष मौर्य और आशुतोष मौर्य को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, आई-10 कार, 11700 रुपये और मोबाइल बरामद किए हैं। मामले में तुषार और शाहरुख और कुछ अन्य आरोपी फरार हैं।
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ऐसे हासिल करते हैं सीवीवी और ओटीपी
फेसबुक आदि पर विज्ञापन देखकर जब कोई ग्राहक ऑनलाइन खरीदारी करता है तो भुगतान नहीं हो पाता। इसके कुछ दिन बाद वे ग्राहक के नंबर पर कॉल कर खुद को उसी नामी कंपनी का प्रतिनिधि बताते हैं, जिससे ग्राहक खरीदारी करने का प्रयास कर रहा था। आरोपी वेबसाइट पर ट्रैफिक अधिक होने का हवाला देकर परेशानी के लिए माफी मांगते हुए उनके मोबाइल पर एक लिंक भेज देते हैं। लिंक के माध्यम से ही एपीके फाइल ग्राहकों के पास पहुंच जाती है। इस फाइल में जब ग्राहक इसमें अपना नाम पता, सीवीवी आदि डालते हैं, तो आरोपियों को ग्राहकों के मोबाइल पर आने वाली मेल और मैसेज भी आरोपियों को मिल जाते हैं। इसके बाद आरोपी खुद को उनके खाते से दूसरे खाते में रुपये हस्तांतरित कर लेते हैं।
सगे भाई या जीजा-साला सबका अलग किरदार
पुलिस ने बताया कि विनीत को छोड़कर पकड़े गए आरोपी स्नातक हैं और कंप्यूटर शिक्षा में पारंगत हैं। विनीत और ध्रुव आपस में जीजा-साले हैं। ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी से आइडिया लेकर ध्रुव ने फर्जीवाड़ा शुरू किया। संतोष और आशुतोष सगे भाई हैं। विनीत ने 20 हजार रुपये में फर्जी खाते की व्यवस्था की। आशुतोष ने वेबसाइट तैयार की और संचालित भी करता था। सलमान और संतोष फेसबुक पर फर्जी वेबसाइट के लिंक शेयर करते थे। फरार आरोपी लोगों को कॉल कर एपीके फाइल आदि भेजने का काम करते थे।
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पांच लीटर सरसों का तेल और दो किलो चीनी 499 रुपये में
आरोपी ग्रॉसरी आदि घर की जरूरतों का सामान फर्जी वेबसाइट में 70 फीसदी तक डिस्काउंट में बिक्री का झांसा देते थे। आरोपी पांच लीटर सरसों का तेल और दो किलो चीनी 499 रुपये में बिक्री का दावा करते थे। इसी तरह अन्य सामानों पर भी अधिक डिस्काउंट का विज्ञापन देकर लोगों को अपने जाल में फंसा लेते थे।
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कार ही चलता-फिरता दफ्तर व कॉल सेंटर
आरोपी अपने घर या किसी अन्य स्थान से ठगी नहीं करते थे बल्कि आरोपियों से बरामद कार को ही चलता फिरता दफ्तर व कॉल सेंटर बनाया हुआ था। आरोपी जगह-जगह घूमते थे और किसी ग्राहक के फंसने पर कार रोककर उससे ठगी में जुट जाते थे।
यह है एंड्रायड पैकेज किट
एंड्रायड पैकेज किट को को आम भाषा में एपीके फाइल कहा जाता है। इसमें सिंगल एंड्राइड प्रोग्राम के लिए सभी जरूरी फाइलें जिप फॉर्मेट में स्टोर होती हैं, जाे एपीके फाइल बनाता है। वह इसमें स्टोर किया डाटा फाइल की एक्सटेंशन को जिप में बदलकर आसानी से ओपन कर सकता है। इसके अलावा जिप एप्लीकेशन की ओपन डायलॉग बॉक्स के माध्यम से भी फाइल को ओपन कर डाटा देखा जा सकता है।