300 मरीजों की बीमार जिंदगी को मिली ‘ऑक्सीजन’
- जिला अस्पताल के आईसीयू में इलाज कराकर मरीजों ने बचाए करोड़ों रुपये
- निजी अस्पताल छोड़कर सरकारी पहुंचे 100 से ज्यादा गंभीर मरीज
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फेफड़ों की नली में बलगम की गांठ फंसने की वजह से जिंदगी और मौत से जूझ रहे 24 साल के नीरज को निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसे इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का रोजाना का खर्च 40 हजार रुपये बताया गया। परिजन मरीज को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। एक सप्ताह तक अस्पताल के आईसीयू में रखने के बाद उसकी हालात में सुधार है। ऐसा केवल एक मामला नहीं बल्कि दो महीने में 300 से ज्यादा गंभीर रूप से बीमार मरीज सरकारी अस्पताल में उपचार कराकर घर लौट चुके हैं।
सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा 19 जून को शुरू हुई थी। इसे दो महीने पूरे हो चुके हैं। 20 बेड का आईसीयू पहले ही दिन से फुल चल रहा है। सरकारी अस्पताल में पहुंचने वाले गंभीर रूप से बीमार मरीजों को पहले हायर सेंटर में रेफर किया जाता था,। बीते दो महीने में एक भी मरीज को रेफर नहीं किया गया है बल्कि नोएडा के निजी अस्पतालों में महंगे आईसीयू के खर्च से बचने के लिए 100 से अधिक मरीज-तीमारदारों ने जिला अस्पताल की राह पकड़ी है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार निजी अस्पतालों में आईसीयू में वेंटिलेटर पर मरीज को एक दिन रखने का खर्च 40 से 50 हजार रुपये आता है। लेकिन जिला अस्पताल में एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ रहा है। यहां जरूरत पड़ने पर मरीजों को दो सप्ताह तक आईसीयू में रखा जा रहा है। औसतन एक मरीज को पांच दिन भर्ती माना जाए तो दो महीने में भर्ती 300 मरीजों ने जिला अस्पताल में आकर अपना करीब छह करोड़ रुपया बचाए हैं।
दो साल से धूल खा रहे थे वेंटिलेटर
राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के शो विंडो नोएडा के जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। दो साल से वेंटिलेटर स्टोर रूम में पड़े धूल खा रहे थे। नई सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने अस्पताल की पहली मंजिल पर आपातकालीन विभाग के साथ बने तीनों आईसीयू कक्षों में बेड से लेकर वेंटिलेटर तक का इंतजाम कराया, जिसके बाद जरूरतमंद मरीजों को हायर सेंटर या निजी अस्पताल रेफर होने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
देशभर में अस्पताल को चौथा स्थान
आभा एप से पंजीकरण कराने के मामले में नोएडा के जिला अस्पताल को नेशनल रैंकिंग में चौथा स्थान मिला है। इससे पहले यह रैंकिंग सातवीं थी। अस्पताल की सुविधाओं में लगातार सुधार के लिए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक खुद भी अस्पताल प्रशासन की तारीफ कर चुके हैं।
हाल में शुरू सुविधाएं
- आपदा प्रबंधन के लिए 60 अतिरिक्त बेड बढ़ाए
- नए अस्पताल की पैथोलॉजी में ब्लड बैंक खुला
- अस्पताल के आईसीयू में ब्रोंकोस्कोपी सुविधा शुरू
- नवजातों के लिए छह बेड का एनआईसीयू शुरू
- महिलाओं के लिए अलग से फार्मेसी की सुविधा
कोट
मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने की जरूरत नहीं पड़े, इसके लिए सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। दो महीने में काफी कुछ बदलाव हुआ है। आगे भी सुविधाओं में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहेगा। -डॉ. रेनू अग्रवाल, सीएमएस-जिला अस्पताल