हिंदी के जरिए अपनी जड़ों की तलाश
-यूके हिंदी समिति के सदस्यों ने किया अमर उजाला कार्यालय का दौरा, साझा किए अनुभव, जानी अखबार की कार्य प्रणाली
नोएडा। भले ही ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों में रहते हुए रोजमर्रा की व्यस्तताओं के बीच वह अपनी संस्कृति के बारे में बहुत सोच-विचार नहीं कर पाते हों, लेकिन उन्हें पता है कि उनकी जड़ें तो उस महान देश में ही हैं। जिसे वह इंडिया के नाम से जानते हैं। हिंदी के जरिए अपनी जड़ों को जानने- समझने की चाहत ही उन्हें भारत खींच लाई है।
यूके हिंदी समिति का एक दल इन दिनों भारत में है। इस दल में ज्यादातर बच्चे हैं तो एक डॉक्टर दंपती भी हैं। शनिवार को यह दल अमर उजाला के सेक्टर-59 स्थित कार्यालय पहुंचा और अखबार की कार्यप्रणाली को नजदीक से जाना समझा। इस दौरान दल के सदस्यों ने भारत भ्रमण के अनुभव साझा करते हुए एक से बढ़कर एक कविताएं व फिल्मी गीत सुनाए।
नर हो, न निराश करो मन को, मैथिलीशरण गुप्त की यह कविता पुरानी पीढ़ी को ही निराशा से नहीं उबारती बल्कि ब्रिटेन में भारतवंशी बच्चों के लिए भी संबल बनी हुई है। अमर उजाला के साथ संवाद के दौरान दल की सदस्य ने इस कविता का सस्वर पाठ किया तो सभाकक्ष तालियों से गूंज उठा। दल में शामिल हिमान्या कामथ, तवीशा वशिष्ठ, मृणाली विजयकुमा और तान्या शर्मा, सभी न केवल भारतीय गानों की फैन रहीं हैं, बल्कि भारतनाट्यम जैसा शास्त्रीय नृत्य भी सीख रही हैं। यह बालिकाएं जब केसरी फिल्म का गाना गुनगुनाती हैं और दोस्त समोसे की तरह होते हैं जैसी कविता का बेहद सहज और प्रभावी पाठ करती हैं तो यह साबित करता है कि इनकी जड़ों से जुड़ने की ललक कितनी गहरी है। दल में शामिल लता विनायक राव, जो पेशे से डॉक्टर हैं, मूलतः तमिलनाडु की रहने वाली है। वह इन दिनों ब्रिटेन में हिंदी में भजन सीख रही हैं। उन्होंने अपनी सधी आवाज में भजन सुनाकर सबको चमत्कृत कर दिया। इसी तरह रिशान शर्मा, ईशान सिंघल और अयाज कंसल भी भारत भ्रमण को लेकर खासे उत्साहित दिखे। उनका कहना था कि उन्हें यहां रोज कुछ नया सीखने को मिल रहा है। इस दल का मार्गदर्शन कर रहे सुरेखा चोफला, नरेश वेदी, पूनम मिश्रा और सु्रभि वडगामा का कहना था कि ब्रिटेन में रह रहे भारतवंशी अपने बच्चों को हिंदी सिखाने के लिए खासे उत्सुक हैं, हालांकि भिन्न वातावरण में बच्चों को हिंदी सिखाने में कई तरह की अड़चनें आ रही हैं। यूके हिंदी समिति इन चुनौतियों का सामना करते हुए हिंदी के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारत में स्वागत से अभिभूत दल के सदस्यों ने अमर उजाला भ्रमण के अपने अनुभव को बेहद उपयोगी करार दिया और अगले साल फिर से नए सदस्यों के साथ अखबार की कार्यप्रणाली जानने के लिए यहां आने की इच्छा जताई।