साहिबाबाद। लिंकरोड थानाक्षेत्र के साहिबाबाद गांव निवासी टैक्सी चालक योगेश (34) की हत्या उनकी पत्नी पूजा ने अपने प्रेमी आशीष के साथ मिलकर की थी। हत्या के लिए पूजा ने आशीष के परिचित चंद्रपाल को एक लाख रुपये की सुपारी दी थी।
पुलिस की पूछताछ में पूजा ने प्रेमी से शादी करने के लिए तलाक न मिलने को हत्या की वजह बताया। 11 अक्तूबर को पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया। यहां से न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया है।
एसीपी साहिबाबाद श्वेता यादव ने बताया कि योगेश टैक्सी चलाकर और फैक्टरी में काम करके परिवार चलाते थे। परिवार में उनकी पत्नी, एक सात व दूसरा चार साल का बेटा है। करीब तीन साल पहले उनकी पत्नी आशीष के संपर्क में आई और दोनों का प्रेम-प्रसंग शुरू हो गया। योगेश को जब यह पता चला तब उसने इसका विरोध किया। कई बार दोनों के बीच हाथापाई भी हुई। इसके बाद पूजा और आशीष पिलखुवा में किराये पर कमरा लेकर बच्चों के साथ रहने लगे। यहां पूजा को स्वास्थ्य कारणों के चलते अपना ऑपरेशन कराना पड़ा।
उसकी देखरेख और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आशीष पर आ गई। तंग आकर आशीष ने पूजा को मायके जाने और अलग होने की बात कही। पूजा मायके चली गई लेकिन उसने आशीष को दुष्कर्म के मामले में फंसाने की बात कही। समझौते में पूजा ने तीन लाख रुपये की मांग रखी। आशीष ने हामी भर दी। इसके बाद पूजा योगेश के पास वापस चली आई।
आशीष से दोबारा बातचीत हुई और शादी करने पर सहमति बनी। इसके लिए पूजा ने योगेश से करीब तीन-चार बार तलाक मांगा लेकिन उसने मना कर दिया। इसके बाद ही दोनों ने मिलकर योगेश की हत्या की योजना बनाई थी।
तीसरी कोशिश में उतारा मौत के घाट : पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने तीन महीने पहले हत्या की योजना बनाई थी। आशीष ने अपने परिचित चंद्रपाल से संपर्क किया। हत्या की सुपारी चंद्रपाल ने एक लाख रुपये में तय की। उसने अपने साथी प्रवीण को भी इसमें शामिल किया। हत्या का पहला प्रयास 13 सितंबर को बिजनौर में हुआ। बिजनौर में पूजा का एक मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। इसे वह गाजियाबाद ट्रांसफर कराना चाहती थी। इस प्रक्रिया के लिए उसने योगेश को बिजनौर बुलाया।
चंद्रपाल और प्रवीण भी पहुंच गए लेकिन प्रवीण योगेश को नहीं पहचान पाया और उस दिन उसकी जान बच गई। दूसरी कोशिश में 15 सितंबर को आशीष ने पिलखुवा स्थित कमरे का मालिक बनकर फोन किया और पूजा का सामान ले जाने के लिए साहिबाबाद स्टेशन बुलाया। योगेश के न जाने पर उसकी जान बची। तीसरी बार 24 सितंबर को पूजा ने पिलखुवा बुलाया। यहां पहुंचने पर जब योगेश ने पूजा को आशीष के साथ खड़ा देखा तब वह उनके पास पहुंचा और कहासुनी शुरू हुई। तभी चंद्रपाल ने पिलखुवा बस अड्डे से खरीदे पेपर कटर से हमला कर दिया। बचने के लिए वह जंगल में भागा लेकिन चंद्रपाल और प्रवीण ने उसे मौत के घाट उतार दिया।