चार में से तीन बच्चों को ही निकाल पाए नाजमीन और हसमत
सहरी खाकर सोए थे सब, जागे तो कमरे में भर गया था धुंआ
परिवार को बचाने में झुलसे पिता और बेटी अस्पताल में भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। शास्त्री पार्क हादसे में हसमत और नाजमीन चार में से तीन बच्चों को ही निकाल पाए। मासूम बेटा हमजा धुएं में कहीं खो गया। हादसे के बाद नाजमीन बेसुध थी। वह बस एक ही बात बार-बार बोल रही थी कि ‘हाय मेरा हमजा’। पड़ोस की महिलाएं उसे किसी तरह संभालने को कोशिश कर रही थीं। महिलाएं उसे धूप से हटकर छांव में बैठने के लिए कहती रहीं, लेकिन नाजमीन दीवार की टेक लिए बेसुध पड़ी रही। बच्चे कभी उससे लिपटते तो कभी लोगों को देखतेे।
पहली मंजिल पर परिवार ने सुबह चार बजे उठकर एक साथ सहरी की थी और सो गए थे। करीब आठ बजे भूतल से चीख सुनकर जागे तो पूरा कमरा धुएं से भरा था। बिजली भी गुल थी। अंधेरे और धुएं के कारण कमरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। नाजमीन और पति हसमत अली जान बचाकर हड़बड़ी में तीन बच्चों को लेकर किसी तरह घर से बाहर निकल पाए। आग इतनी भयावह थी कि घर के खिड़की, दरवाजों से धुएं का गुबार निकल रहा था। हसमत बेटे हमजा को बचाने केे लिए दोबारा घर में जाना चाहते थे, लेकिन लोगों ने उन्हें पकड़ लिया। हसमत चिल्लाते रहे कि हमजा नहीं मिला, वो अंदर जा रहे हैं। लोगों ने किसी तरह उन्हें काबू किया और समझाया कि यदि अंदर गए तो जिंदा वापस नहीं लौटोगे। हसमत बेटी माहिरा (6), बेटे फरहान (4), बेेटी सोनी (15) और पत्नी को चादर में लपेटकर सीढ़ियों से किसी तरह नीचे आए। इस बीच उनके हाथ, सर के बाल और चेहरा झुलस गया। उनका साथ देने में सोनी भी लपटों की चपेट में आ गई। सोनी और हसमत को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।