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स्कूल किताबें व ड्रेस खरीदने के लिए नहीं कर सकते बाध्य: आतिशी

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- शिक्षा मंत्री ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ शिक्षा निदेशालय को सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश
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- स्कूल की शिकायत मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने को भी कहा

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने अभिभावकों को महंगी किताबें और स्कूल ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर करने वाले स्कूलों पर अब कार्रवाई होगी। शिक्षा मंत्री आतिशी ने शिक्षा निदेशालय को ऐसे स्कूलों के खिलाफ आदेश दिए हैं। स्कूल की शिकायत मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा है। उल्लंघन होने पर दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 1973 के संबंधित प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पिछले कुछ दिनों से शिक्षा मंत्री को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि निजी स्कूल खास दुकानों या वेंडरों से महंगी किताबें और स्कूल वर्दी खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। अब शिक्षा मंत्री ने शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय को निर्देश देते हुए कहा है कि जो निजी स्कूल किताबें व स्कूल ड्रेस के नाम पर अभिभावकों से मोटा पैसा कमा रहे हैं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा है कि निजी स्कूल अभिभावकों को मजबूर करना बंद करें या फिर कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें। 17 मार्च 2023 को जारी किए निर्देशों का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ जांच करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस सब की उसकी साप्ताहिक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
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यह है शिक्षा निदेशालय की गाइडलाइंस
शिक्षा निदेशालय की गाइडलाइंस के अनुसार निजी स्कूलों को नए सत्र में प्रयोग में आने वाले किताबों व अन्य पाठ्य सामग्री की कक्षावार सूची नियमानुसार स्कूल की वेबसाइट और विशिष्ट स्थानों पर पहले से ही प्रदर्शित करनी होती है। इसके अलावा स्कूल को अपनी वेबसाइट पर स्कूल के नजदीक की कम से कम पांच दुकानों का पता और टेलीफोन नंबर भी प्रदर्शित करना होता है। स्कूल किसी विशिष्ट विक्रेता से इन चीजों को खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। निदेशालय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी निजी स्कूल कम से कम तीन साल तक स्कूल ड्रेस के रंग, डिजाइन व अन्य चीजों को बदल नहीं सकता।
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