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सभी केंद्रों के ध्यानार्थ::: पेसमेकर लगाकर किया सिजोफ्रेनिया का इलाज

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पेसमेकर लगाकर किया सिजोफ्रेनिया का इलाज
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- 13 साल की उम्र से पीड़ित था मरीज, किसी के होने का करता था आभास
- डॉक्टरों का दावा, इस विधि से इलाज का देश में पहला मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मनोरोग सिजोफ्रेनिया से पीड़ित 28 साल के मरीज के ब्रेन में पेसमेकर लगाकर इलाज किया गया है। डॉक्टरों का दावा है कि सिजोफ्रेनिया के उपचार में देश में ऐसा पहली बार किया गया है। निजी अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने न्यूक्लियस एक्यूमबेंस-डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी के माध्यम मरीज के दिमाग के प्रभावित हिस्से को टारगेट करके इलेक्ट्रोड का प्रत्यारोपण किया है।
इलेक्ट्रोड ब्रेन की असामान्य गतिविधियों को रेगुलेट करने और स्थिति बहाल करने के लिए इलेक्ट्रिकल इंपल्स की आपूर्ति करता है। इस सर्जरी के बारे में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर हिमांशु चंपानेरी ने बताया कि जब मरीज हमारे पास आया था तो उसमें सिजोफ्रेनिया के लक्षण थे। इसके लिए मनोरोग विभाग के दो वरिष्ठ डॉक्टरों से संपर्क किया गया और इसके इलाज के लिए मैंगनेटिक थेरेपी सहित अन्य पर विचार किया गया। जब कोई विकल्प नहीं मिला तो इस विधि का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया। इस विधि में मरीज के दिमाग के प्रभावित पांच मिमी हिस्से को टारगेट किया गया। प्रभावित हिस्से को पेसमेकर से कनेक्ट कर दो लीड से जोड़ा गया। पेसमेकर बैटरी से जुड़ा हुआ है जो मरीज के लक्षण के आधार पर करंट की तरंग छोड़कर उन लक्षणों को नियंत्रित करता है। इस सर्जरी प्रक्रिया में 8-10 घंटे लगे और इसके बाद मरीज को रातभर आईसीयू में रखा गया। उन्होंने बताया कि सर्जरी के 13 दिन बाद मरीज में काफी सुधार देखा जा रहा है। 80 फीसदी तक लक्षण भी घट गए हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि यदि सुधार की गति इसी तरह रही तो आने वाले कुछ सालों में दवा भी बंद हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह देश में पहला मामला है और दुनिया में ऐसे 13 मामले हैं।
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जटिल मानसिक बीमारी है सिजोफ्रेनिया
डॉक्टरों का कहना है कि सिजोफ्रेनिया एक जटिल मानसिक बीमारी है। देश में सात मानसिक रोगियों में से एक मरीज में सिजोफ्रेनिया के लक्षण दिखाई देते हैं। इसमें मरीज को मतिभ्रम हो जाता है। उसे अलग-अलग आभास होता है। इस मामले में भी मरीज ने खुद को आठ साल तक एक कमरे में कैद कर लिया था। वह सबसे अलग-थलग हो गया था जिसकी वजह से जीवन स्तर, सामाजिक जीवन और शैक्षणिक विकास पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा।
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