नई दिल्ली। राजधानी बीती शाम संगीत, नृत्य और कविता की लहरों में डूबी नजर आई। ऐवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम में 'परछाइयां-ए शरीफ इंसानों' एक अनोखी संगीतमय नृत्य नाटिका मंचित हुई, जो महान शायर साहिर लुधियानवी की स्मृति को समर्पित थी।
डॉ प्रेम भंडारी और लईक हुसैन की निर्देशित इस प्रस्तुति ने द्वितीय विश्व युद्ध के पहले और बाद की त्रासदी, मानवता के संघर्ष और शांति की खोज को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया। संगीत, अभिनय और नृत्य का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को भीतर तक झकझोर दिया। डॉ प्रेम भंडारी की रचना संगीत इस नाटक की आत्मा बनी रही। वहीं, सितार, तबले और सूफियाना सुरों ने संवादों में गहराई घोली। वहीं दूसरी तरफ लईक हुसैन के निर्देशन में तीस कलाकारों ने मंच पर जीवन की परछाइयों को साकार किया। हर दृश्य, हर भाव ने यह संदेश दिया कि युद्ध की राख में भी इंसानियत की लौ जलती रहनी चाहिए। लगभग डेढ़ घंटे तक दर्शक मंत्रमुग्ध होकर इस प्रस्तुति में डूबे रहे। अंत में सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। ब्यूरो