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अब ग्रेटर नोएडा की आरडब्ल्यूए को मिल सकेगी मान्यता

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बोर्ड बैठक में फैसला ग्रेटर नोएडा की आरडब्ल्यूए को मिलेगी मान्यता
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा की आरडब्ल्यूए, अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन और कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों को मान्यता मिल सकेगी। ग्रेनो प्राधिकरण की मंगलवार को हुई बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सेक्टरों से जुड़े कार्यों को दो श्रेणी में बांटा गया है। पहली श्रेणी के कार्य आरडब्ल्यूए को अनिवार्य रूप से कराने होंगे, जबकि दूसरी श्रेणी में वैकल्पिक कार्य होंगे। इन कार्यों पर कुल खर्च का 50-50 फीसदी रकम दोनों मिलकर वहन करेंगे।
ग्रेटर नोएडा में करीब 100 आरडब्ल्यूए, अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) और को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियां हैं। इनमें से 60 के करीब पंजीकृत हैं। अब तक ये आरडब्ल्यूए सेक्टर की समस्याओं को प्राधिकरण स्तर तक पहुंचाने का काम करती थीं। प्राधिकरण उन कार्यों को कराता था। पहली बार प्राधिकरण ने इनको मान्यता देने जा रहा है। पंजीकृत आरडब्ल्यूए, अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन और को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियां आवेदन करेंगी तो उनको मान्यता मिल जाएगी। प्राधिकरण ने इनके लिए कार्य भी तय कर दिए हैं।
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इन कार्यों को दो श्रेणी में रखा है। पहली श्रेणी अनिवार्य कार्यों की है, जिसमें पालतू कुत्तों का पंजीकरण, स्ट्रे ड्रॉग्स की समस्या व खाली भूखंडों की सफाई शामिल हैं, जबकि वैकल्पिक कार्यों में सामुदायिक केंद्र की देखभाल व संचालन, पार्कों व ग्रीन बेल्ट की देखभाल, स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव, घरों से निकल रहे कूड़े का प्रबंधन, सफाई व्यवस्था, पेड़ों की सिंचाई व छंटाई आदि कार्य शामिल हैं।
प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि 35 आरडब्ल्यूए की तरफ से मान्यता के लिए आवेदन आया है। बची हुई आरडब्ल्यूए भी आवेदन कर सकेंगी। अगर आरडब्ल्यूए मान्यता नहीं चाहती है तो वह पुरानी व्यवस्था के तहत काम कर सकती हैं। यह निर्णय आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों पर ही निर्भर है। फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए ग्रेटर नोएडा के अध्यक्ष देवेंद्र टाइगर ने प्राधिकरण के इस फैसले का स्वागत किया है। मान्यता पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका भी वापस ली जाएगी।
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कुत्ते पालने के लिए कराना होगा पंजीकरण
प्राधिकरण के मुताबिक, सेक्टरों में कुत्तों को पालने वालों का पंजीकरण किया जाएगा। करीब 1000 रुपये पंजीकरण शुल्क देना पड़ सकता है। इसकी आधी रकम प्राधिकरण को और आधी रकम आरडब्ल्यूए को मिलेगी। सेक्टर में रहने वाले हर व्यक्ति को अनिवार्य रूप से सदस्य बनना होगा। उसे रखरखाव शुल्क भी देना पड़ेगा। सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग से मिलने वाली रकम आधी प्राधिकरण को और आधी आरडब्ल्यूए को मिल सकेगी।
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