अप्रैल में एयरपोर्ट के संचालन के लिए 15 दिसंबर तक रनवे का ट्रायल जरूरी
- निर्धारित तिथि में डीजीसीए की टीम ने नहीं किया निरीक्षण तो उद्घाटन की तिथि में हो सकता है बदलाव
- अधिकारियों का दावा, सभी औपचारिकताएं हैं पूरी, रनवे से टेक ऑफ और लैंडिंग का होगा सफल ट्रायल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अप्रैल से व्यावसायिक संचालन के लिए अब 10 दिन की समयसीमा और बची है। नागर विमानन निदेशालय (डीजीसीए) ने यदि 10 दिन में रनवे ट्रायल नहीं किया तो एयरपोर्ट के उद्घाटन की समयसीमा में भी बदलाव संभव है। फिलहाल, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के अधिकारियों का दावा है कि 15 दिसंबर से पहले डीजीसीए अपनी सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेगा और रनवे पर विमान की लैंडिंग व टेक ऑफ के जरिये ट्रायल की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे के ट्रायल के लिए डीजीसीए से 15 दिसंबर तक की समयसीमा तय की गई है। ऐसे में निर्धारित तिथि पर कामर्शियल ट्रायल रन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र का इंतजार है। पहले 30 नवंबर को ट्रायल रन की तारीख नियत की गई थी। मगर, एनओसी नहीं मिलने के कारण अब 15 दिसंबर तक मौका है। कैलिब्रेशन ट्रायल के बाद रनवे का ट्रायल प्रस्तावित है। इस ट्रायल के बाद यापल हवाई अड्डे के प्रमाणीकरण के लिए दस्तावेज को अंतिम रूप देगा और इसे डीजीसीए को सौंप देगा। एयरपोर्ट से वाणिज्यिक उड़ान शुरू होने से पहले हवाई अड्डे को डीजीसीए और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) से प्रमाणीकरण की आवश्यकता होगी। इसके लिए समयसीमा का निर्धारण भी किया गया है। अबतक एयरपोर्ट पर कैट-1 और कैट-3 उपकरण स्थापित हो चुके हैं, जो कोहरे में विमान की ऊंचाई और दृश्यता की जानकारी देते हैं। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) को स्थापित किया जा चुका है, एयरक्राफ्ट बीच किंग एयर 360 ईआर के जरिए 10 से 14 अक्तूबर तक जांच की जा चुकी है।
ट्रायल रन के बाद शुरू होगा रूट का निर्धारण
एयरपोर्ट पर ट्रायल रन के बाद रूटों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें विमानन कंपनियां अलग-अलग एजेंसियों से यात्रियों की पसंदीदा रूट का सर्वे कराएंगी और इसी आधार पर अपने रूट की घोषणा करेंगी। फरवरी से विमानन कंपनियां टिकटों की बुकिंग शुरू करेंगी।
रनवे के ट्रायल के लिए 15 दिसंबर तक का समय है और सबकुछ निर्धारित योजना के अनुसार चल रहा है। रनवे के ट्रायल के बाद डीजीसीए और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो से प्रमाणीकरण कराया जाएगा।
शैलेंद्र भाटिया, ओएसडी, यमुना प्राधिकरण