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Noida News: 2011 से अधूरी पड़ी सड़कें आज तक नहीं हुईं पूरी, आए दिन हादसे

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- अमर उजाला ग्रामीण संवाद
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- थापखेड़ा गांव में आयोजित अमर उजाला संवाद में ग्रामीणों ने बताईं समस्याएं
- बोरवेल के पानी के सहारे हैं ग्रामीण, सफाई नहीं होने से पनप रहीं बीमारियां

संवाद न्यूज एजेंसी

ग्रेटर नोएडा। थापखेड़ा गांव को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कागजों पर भले ही दो दशक पहले आदर्श गांव घोषित कर दिया हो, लेकिन यहां के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह रहे हैं। लोगों का आरोप है कि साल 2011 में अधूरी छोड़ी गई सड़कें आज तक पूरी नहीं बन पाई हैं। लोगोंं का आरोप है कि गांव के मुख्य मार्ग के अलावा गलियों तक की स्थिति बदहाल हो चुकी है। बरसात के समय में निकल पाना मुश्किल होता है। आए दिन सड़क हादसे होते हैं। कई बार प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है ।

ग्रेटर नोएडा के थापखेड़ा गांव में सोमवार को आयोजित हुए अमर उजाला संवाद में ग्रामीणों ने समस्याएं बताईं। लोगों का आरोप है कि पूरा गांव आज भी बोरवेल के पानी के सहारे जीवनयापन कर रहा है। पानी की पाइप सप्लाई लाइन बिछे दशकों बीते जा रहे हैं, लेकिन आज तक एक बूंद पानी नहीं आया है। इसके अलावा जगह-जगह पर सीवर टूटे पड़े हुए हैं। ओवर फ्लो होकर बहा करते हैं। सड़कों पर गंदा पानी भरा रहता है। लोगों का आरोप है कि बिजली के पोलों पर लगी स्ट्रीट लाइटें शोपीस बन कर रह गई हैं। नियमित सफाई नहीं होने के कारण चारों ओर गंदगी फैली रहती है। इससे गांव में बीमारियां फैल रही हैं। गांव के तालाब की सालों से सफाई नहीं हुई। बारातघर भी जर्जर है।
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इंटर कॉलेज और खेल का मैदान नहीं


इंटर कॉलेज स्कूल नहीं होने के कारण बच्चों को गांव से काफी दूर पढ़ाई करने के लिए जाना पड़ता है। इससे बच्चों को काफी परेशानियां होती हैं। समय की बर्बादी होने के साथ शारीरिक परिश्रम अधिक होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। इसके अलावा गांव में खेल का मैदान नहीं होने के कारण युवाओं को सरकारी भर्तियों और खेलों के अभ्यास करने के लिए 15 से 20 किमी दूर जाना पड़ता है।
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प्राधिकरण कर रहा वादा खिलाफी


ग्रामीणों का आरोप है कि प्राधिकरण ने भूमि अधिग्रहण करते समय 10 प्रतिशत प्लॉट देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक छह फीसदी ही मिल पाए हैं। बाकी के चार फीसदी प्लॉट अभी तक नहीं मिल पाए हैं। अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, अब तो उम्मीद ही खत्म हो रही है।

बयान-1
गांव के मुख्य मार्ग से लेकर गलियों तक की स्थिति बदहाल हो चुकी है। आए दिन हादसे हुआ करते हैं। साल 2011 से सड़कें अधूरी पड़ी हुई हैं।
शशांक भाटी

बयान-2
पानी सप्लाई की लाइन तो बिछा दी गई, लेकिन आज तक एक बूंद पानी नहीं आया है। हम लोग बोरवेल के पानी के सहारे रहते हैं।
संदीप भाटी


बयान-3
शमशान घाट देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुका है। हादसों को दावत दे रहा है। इसके अलावा पानी और लाइट के साथ ही मार्ग की भी स्थिति बदहाल है।
आशु भाटी


बयान-4
खेल के मैदान नहीं होने के कारण युवाओं को खेल और सरकारी भर्तियों की तैयारी करने के लिए गांव से करीब 15 से 20 किमी दूर जाना पड़ता है।
- जीतराम भाटी


बयान-5
इंटर कॉलेज गांव में बनाया जाना चाहिए। जिससे बच्चों को पढ़ाई करने के लिए बाहर न जाना पड़े। जिससे बच्चों को अन्य होने वाली समस्याओं से निजात मिल सके। -
-कौर सिंह भाटी


बयान-6

गांव में नियमित सफाई नहीं होने के कारण चारों ओर गंदगी फैली रहती है। इसके अलावा सीवर ओवरफ्लो की भी समस्या आए दिन बनी रहती है।
श्याम सिंह भाटी
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