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Noida News: सिकुड़ रहीं नदियां व वेटलैंड, धरती की कोख भी प्यासी

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विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस-
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- शहरीकरण और संरक्षण में अनदेखी से जिले में खत्म हो रही प्रकृति धरोहर और स्त्रोत
- गिर रहा भूजल स्तर, खत्म हो रही खेती व हरियाली, डूब क्षेत्र में हो रहा अवैध निर्माण
नवीन कुमार
यमुना सिटी। देश-विदेश में प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। गौतमबुद्ध नगर में भी संरक्षण के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। यहां यमुना और हिंडन दो नदियां हैं। जो अवैध निर्माण के कारण सिकुड़ती जा रही है। विकास व शहरीकरण के नाम पर खेती लगभग खत्म हो चुकी है। अधाधुंध भूजल दोहन से जल स्तर तेजी से गिर रहा है। काफी जगह पानी पीने लायक नहीं रहा है। वेटलैंड भी अनदेखी के शिकार हो रहे हैं। चारों तरफ कंक्रीट की इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। पौधरोपण किया जा रहा है, परंतु पौधों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

-वेटलैंड के चारों तरफ अवैध निर्माण, पानी दूषित

सूरजपुर वेटलैंड करीब 300 हेक्टेयर जमीन पर फैला हुआ है। हर वर्ष यहां पर बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। पर्यटक भी काफी जाते है, लेकिन अनदेखी के कारण वेटलैंड पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसके चारों तरफ अवैध निर्माण हो गया है। बड़ी-बड़ी बिल्डिंग व मकान बन गए हैं। जबकि एनटीजी ने 50 मीटर के दायरे में निर्माण पर रोक लगा रखी है। अब इन कॉलोनियों का गंदा पानी वेटलैंड में जा रहा है। गंदे पानी से हजारों पेड़ सूख गए। पिछले एक साल से दूषित पानी के लिए एसटीपी लगाने की कवायद चल रही है, लेकिन अब तक नहीं लग सका। वहीं धनौरी वेटलैंड का भी संरक्षण नहीं हो रहा है। पिछले एक साल से प्रस्ताव शासन स्तर पर अटका हुआ है।
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अवैध फार्म हाउस व मकानों से सिकुड़ी नदियां
जिले में हिंडन और यमुना नदी सिकुड़ती जा रही है। आज से 30-40 वर्ष पहले जैसे स्वरूप नदियों का नहीं रहा है। यमुना के किनारे अवैध फार्म हाउस बन चुके हैं। वहीं हिंडन के किनारे अवैध कॉलोनी बस चुकी है।

नदी का बहाव तक मोड़ा
कई जगह नदी का बहाव तक मोड़ दिया गया है। यह सिलसिला अभी भी जारी है। नदियों को बचाने के लिए हर वर्ष जिला स्तर पर योजना बनती है। पेड़ लगाए जाते है, लेकिन अनदेखी से योजना असफल साबित हो रही है। कुछ साल पहले जल स्तर बढ़ने पर बड़ी संख्या में लोगों को बाहर निकाला गया। तब भी अवैध निर्माण को तोड़ने का दावा किया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

गिर गया भूजल स्तर, पानी का संकट सिर पर

नोएडा, ग्रेटर नोएडा से लेकर दादरी, जेवर आदि जगह पर तेजी से भूजल स्तर गिर रहा है। हर वर्ष एक मीटर तक भूजल स्तर गिरा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर यहीं हाल रहा तो दिल्ली की तरह लाइन में लगकर पानी लेना होगा। चिंताजनक स्थिति होने के बाद भी जल संरक्षण के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। बिल्डर प्रोजेक्टों पर अवैध तरीके से भूजल दोहन हो रहा है। सभी इमारतों के रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बंद है। वाटर रिचार्ज पर काम नहीं किया जा रहा है। गंगाजल आने के बाद भी प्राधिकरण पूरे शहर में भूजल की आपूर्ति कर रहा है।
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भूउपयोग बदलकर खड़ी की जा रहीं इमारतें पर्यावरणविद विक्रांत तोंगड़ का कहना है कि जिले में खेती लगभग खत्म हो चुकी है। खेती से जुड़ाव भी कम हो गया है। भूउपयोग बदलकर कंक्रीट की इमारत खड़ी की जा रही है। इस कारण लोग भी प्रकृति से अलग हो चुके है। पहले नीम के पेड़ के नीचे बैठकर लोग समय गुजारते थे, लेकिन अब एसी का कमरा चाहिए। उसके बिना बैठ नहीं सकते है। नदियों का जल स्तर भी कम हो गया है। ग्रॉस लैंड भी नहीं बची है। पौधरोपण में विदेशी पौधों का उपयोग किया जा रहा है, जो कारगर नहीं है।
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