मुठभेड़ में एक लाख का इनामी घायल, तीन अन्य गिरफ्तार
- शासन के चिह्नित गैंगस्टर की लिस्ट में है शामिल, ट्रांसपोर्ट, स्क्रैप के ठेके कब्जाने और रंगदारी वसूलने 20 मामले हैं दर्ज
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बीटा-2, कासना थाना पुलिस और स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने शुक्रवार रात इमलिया गांव निवासी एक लाख के इनामी मनोज आसे पैर में गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस ने मनोज और उसके साथी जीतू, आजाद सिंह और संजय को गिरफ्तार कर लिया है। मनोज आसे का नाम शासन के चिन्हित गैंगस्टरों व माफिया की लिस्ट में शामिल है। वह थार में सवार होकर किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। मनोज पर ट्रांसपोर्ट, स्क्रैप के ठेके कब्जाने, हत्या के अलावा रंगदारी वसूलने के 20 मामले दर्ज हैं। आरोपी की गिरोह में दिल्ली क्राइम ब्रांच का हेड कांस्टेबल जगत सिंह भी काम कर चुका है। जिसे एसटीएफ ने मार्च 2019 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
डीसीपी ग्रेटर नोएडा जोन साद मियां खान ने बताया कि शुक्रवार शाम कासना थाना पुलिस ने कार सवार इमलिया गांव निवासी आजाद सिंह और दनकौर के समसपुर गांव निवासी संजय को गिरफ्तार किया। तभी काली फिल्म चढ़ी थार सवार आरोपी पुलिस टीम पर फायर करते हुए भाग निकले। पुलिस और स्वाट टीम आरोपियों की तलाश में जुट गई। टीम को एच्छर चौकी के पास थार देखे जाने की सूचना मिली। मौके पर आरोपी पुलिस टीम पर फायरिंग कर फिर भाग निकले। पुलिस टीम ने पीछा किया। ढकिया वाले बाबा के मंदिर जाने वाली रोड के पास आरोपियों की थार पेड़ से टकरा गई। मौके पर हुई मुठभेड़ में मनोज के पैर में गोली लग गई। मौके से ही इमलिया गांव के जीतू उर्फ जितेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
बुलेट प्रूफ स्कॉर्पियो से एसटीएफ को चकमा देकर भाग गया था मनोज
नोएडा एसटीएफ ने मार्च 2019 में मुठभेड़ के दौरान 25 हजार के इनामी पवन बागपुर समेत छह बदमाशों को गिरफ्तार किया था। जबकि मनोज आसे चकमा देकर भागने में कामयाब हो गया था। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एसटीएफ ने बुलेट प्रूफ स्कॉर्पियो और फॉर्च्यूनर कार बरामद की थी। सुंदर भाटी से अलग होने के बाद मनोज गैंगस्टर हरेंद्र खड़खड़ी से जुड़ गया था। वर्ष 2019 में बुलेट प्रूफ स्कोर्पियो में मनोज आसे के अलावा हरेंद्र खड़खड़ी होने की जानकारी मिली थी। मनोज विदेशियों से भी रंगदारी वसूलता था।
वर्ष 2008 में तीन ट्रांसपोर्ट कारोबारी की हत्या से आया चर्चा में
बताया गया है कि वर्ष 2008 में कासना थाना क्षेत्र में शाहबुद्दीन समेत तीन ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की हत्या की गई थी। इस केस में उस दौरान मनोज आसे का नाम सामने आया था। आरोपी जिले की कंपनियों में लगने वाली गाड़ियों के ठेके कब्जाने का काम करता था। हालांकि इससे पहले भी आरोपी वारदात कर चुका था। इसके बाद भी आरोपी ताबड़तोड़ वारदात करता रहा।