-मैक्यूलर एडिमा, मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी और ग्लूकोमा की भी हो सकेगी पड़ताल
आशीष चौरसिया
ग्रेटर नोएडा। रेटिना की जांच कराने के लिए शहर के लोगों को अब दिल्ली या गाजियाबाद की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में रेटिना की जांच करने की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। जिम्स में अब ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) से रेटिना की जांच हो सकेगी। अससे रेटिना से जुड़ी हर छोटी से छोटी बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाएगी।
नेत्ररोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कुलदीप गुप्ता ने बताया कि ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी की मदद से अब रेटिना से जुड़ी हर बीमारी की जांच आसानी से की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि यह मशीन टेक्नोलॉजी से लैस है। इससे रेटिना से जुड़ी हर छोटी से छोटी बीमारी को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। इससे मरीजों की आंखों की रोशनी जाने से बचाया जा सकता है। क्योंकि अक्सर जितनी भी रेटिना से जुड़ी बीमारी होती है उनमें लापरवाही बरतने पर मरीज के आंखों की रोशनी चली जाती है। कई बार रोशनी वापस आने की उम्मीद भी खत्म हो जाती है। उन्होंने बताया कि ओसीटी इमेजिंग तकनीक से रेटिना की क्रॉस-सेक्शनल छवियां बनाने के लिए प्रकाश तरंगों का उपयोग करती है। रेटिना तंत्रिका की परत सहित रेटिना की परतों का चित्रण कर देता है और सूक्ष्म परिवर्तनों का पता लगा सकती है।
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800 रुपये में हो सकेगी विट्रोमैक्यूलर ट्रैक्शन व ग्लूकोमा की जांच
उन्होंने बताया कि ओसीटी की मदद से रेटिना में मैक्यूलर एडिमा, उम्र से संबंधित धब्बेदार अधपतन (एएमडी), मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी, मैक्यूलर होल, विट्रोमैक्यूलर ट्रैक्शन और ग्लूकोमा, ड्रूसेन और रेटिनल अवरोधन या रक्तस्राव की जांच की जाएंगी। यह सभी जांच निजी संस्थानों में कराने के लिए मरीजों को 1500 से दो हजार रुपये तक देने पड़ते हैं। जोकि यहां पर मात्र 800 रुपये में यहां पर की जाएगी।