अमर उजाला संवाद
- निवासी बोले, 10 साल से अधिक बीते, अब तक नहीं मिली मूलभूत सुविधाएं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सोसाइटी में वर्षों से रहने वाले निवासियों को प्रतिदिन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पार्किंग को कूड़ा घर बना दिया गया है। निवासियों के विरोध का असर नहीं हो रहा है। लाखों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने के बाद भी सीढ़ियों से फ्लैट में जाना पड़ता है। अब तक फ्लैट का मालिकाना हक नहीं मिल पाया है।
रविवार को आयोजित अमर उजाला संवाद के दौैरान ग्रेनो वेस्ट स्थित एपैक्स फ्लोरा एलिगेंट विले सोसाइटी के निवासियों ने अपनी समस्याएं बताईं। उन्होंने कहा कि हर जिम्मेदार के पास जाकर समस्याओं के समाधान की मांग उठा चुके हैं लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। सोसाइटी में बच्चों के खेलने तक के लिए कोई जगह नहीं है। क्लब हाउस,पार्क से लेकर हर सुविधा के नाम पर वसूली की गई। करीब 12 साल बीत गए अब तक कुछ भी नहीं मिला। अभी तक किसी की रजिस्ट्री नहीं हुई। कई एफआईआर के बाद भी बिल्डर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पार्किंग क्षेत्र में खुले में कूड़ा डंप होता है। बदबू और गंदगी के बीच में निवासियों को आना पड़ता है, कई गड्ढे खुले हुए हैं जो बच्चों के लिए खतरनाक है।
नहीं काम करता एसटीपी, खुले में बह रहा सीवर पानी
निवासियों ने बताया कि सोसाइटी में एसटीपी काम नहीं कर रहा है। सोसाइटी की सीवर का पानी खुले में बहाया जा रहा है। खुले में गंदा पानी बहने से लोग बीमार हो रहे हैं। दूसरी लिफ्ट के लिए छूटी जगह कवर नहीं की गई है। 500 से ज्यादा खरीदारों को आज तक पजेशन नहीं मिला है। वर्ष 2010-11 से सोसाइटी का निर्माण शुरू हुआ था तब वर्ष 2014-15 में पजेशन का वादा किया गया था।
क्या बोले लोग
सोसाइटी में लिफ्ट तक की सही सुविधा नहीं मिल रही है। आए दिन लिफ्ट खराब हो जाती है। - सीमा सिंह
बच्चों के खेलने के लिए पार्क नहीं है। छोटे बच्चे घर में रहने को मजबूर हैं। - प्रियंका झा
स्विमिंग पूल में आज तक किसी ने पानी ही नहीं देखा। सोसाटी में हर ओर बदहाली दिखती है। - दीपक मिश्रा,
रेरा से लेकर प्राधिकरण में शिकायत की। तीन बार मेरा फ्लैट बेचा जा चुका है। कोई समाधान नहीं निकला। - जीसी रुडोला
500 से ज्यादा खरीदारों को आज तक पजेशन नहीं मिला है। निवासी हर दफ्तर का चक्कर लगा चुके हैं। - सचिन गुप्ता,निवासी
2011 में फ्लैट बुक किया। 2017 में पजेशन मिला। उसके बाद भी करीब 9 लाख देने का नोटिस दिया जा रहा है। - नवज्योति सहरिया