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Noida News: चिकनगुनिया के बाद जोड़ों के दर्द में होम्योपैथिक कितनी असरदार...शोध में चलेगा पता

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-चिकनगुनिया से ठीक हो चुके मरीजों को परेशान करता है जोड़ों का दर्द
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-ऐसे मरीजों पर होम्योपैथिक कितनी असरदार, किया जा रहा शोध
-सेक्टर 24 स्थित डॉ. डीपीआर केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान में शोध चल रहा

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चिकनगुनिया से ठीक होने के बाद मरीजों में जोड़ों का दर्द परेशान करता है और होम्योपैथी इसमें कितनी असरदार है इस पर सेक्टर-24 स्थित डॉ. डीपीआर केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान में शोध चल रहा है। शोध में ऐसे मरीजों को प्रमुखता से लिया जा रहा है जो चिकनगुनिया से ठीक हो चुके हैं लेकिन अब जोड़ों के दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं।

संस्थान की रिसर्च ऑफिसर डॉ. स्वाति पांडेय ने बताया कि चिकनगुनिया भी मच्छर से ही फैलता है। चिकनगुनिया ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक जोड़ों में और शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द बना रहता है। ऐसे में हम उन मरीजों पर शोध कर रहे हैं जिनको चिकनगुनिया ठीक हो चुका है लेकिन जोड़ों का दर्द परेशान करता है। इन मरीजों में होम्योपैथिक के प्रभाव को देखा जा रहा है कि होम्योपैथिक कितनी असरदार साबित हो सकती है।
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मौसम के बदलते ही चिकनगुनिया के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक, बुखार उतरने के बाद भी कई मरीजों को हफ्तों और महीनों तक चलने-फिरने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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बुखार तो चला गया, लेकिन दर्द क्यों नहीं
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप कुमार शैलत ने बताया कि बारिश के मौसम में अस्पतालों के ओपीडी में ऐसे मरीजों की कतारें लगी हैं, जो चिकनगुनिया से तो उबर चुके हैं, लेकिन उनके घुटनों, कलाइयों और टखनों का दर्द जाने का नाम नहीं लेता है।
क्रॉनिक अर्थराइटिस का खतरा : कुछ मरीजों में यह दर्द क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाला) हो जाता है, जो 6 महीने से लेकर एक साल तक परेशान कर सकता है।
सुबह की जकड़न : मरीजों को सुबह के समय जोड़ों में अधिक जकड़न और सूजन महसूस होती है।
उम्रदराज लोगों पर अधिक असर : बुजुर्गों और पहले से ही गठिया से पीड़ित लोगों में यह दर्द असहनीय होता है।


बचाव और राहत के उपाय
शरीर को आराम और हाइड्रेशन : बीमारी के शुरुआती दिनों में शरीर को पूरा आराम दें और पानी, नारियल पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें।

हल्की एक्सरसाइज : दर्द थोड़ा कम होने पर फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से हल्की स्ट्रेचिंग और व्यायाम करें ताकि जोड़ जाम न हों।

-संतुलित आहार : सूजन कम करने वाले खाद्य पदार्थ जैसे हल्दी, अदरक आदि अपनी डाइट में शामिल करें।
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