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अमेरिकी कपास पर ड्यूटी हटाना, किसानों से विश्वासघात : केजरीवाल

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आप संयोजक ने कहा - ट्रंप के सामने पीएम मोदी पूरी तरह झुक गए हैं
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा। उन्होंने किसानों से विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर देश में आने वाले कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी हटा दी है जिससे भारतीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह निर्णय न केवल किसानों और उद्योगों को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि भारतीयों के सम्मान पर भी प्रहार है।
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केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले 19 अगस्त से 30 सितंबर तक अमेरिकी कपास पर 11 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी हटाई थी जिसे अब बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 तक कर दिया गया है। इससे अमेरिकी कपास भारत के किसानों के कपास से 15-20 प्रतिशत सस्ता हो जाएगा। ऐसे में जब अक्तूबर से भारतीय किसानों का कपास मंडियों में पहुंचेगा तो टेक्सटाइल उद्योग अमेरिकी कपास खरीद चुका होगा और हमारे किसानों को औने-पौने दाम पर उपज बेचनी पड़ेगी। ट्रंप के सामने मोदी पूरी तरह झुक गए हैं। जितना झुकेंगे ट्रंप उतना ही झुकाएंगे। पीएम मोदी को चाहिए कि अमेरिकी कपास पर तुरंत 11 प्रतिशत ड्यूटी बहाल करें और यदि जरूरत हो तो अमेरिका पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर मुंहतोड़ जवाब दें। जब अमेरिका गुंडागर्दी कर सकता है तो भारत भी बहादुरी से जवाब क्यों नहीं दे सकता। यूरोपियन यूनियन, चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों ने ट्रंप के टैरिफ का डटकर जवाब दिया तो उन्हें झुकना पड़ा लेकिन भारत जैसा बड़ा देश चुपचाप सब सह रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। पिछले साल ही किसानों को कपास पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिला था और उन्हें औने-पौने दाम पर उपज बेचनी पड़ी थी। विदर्भ, तेलंगाना, पंजाब और गुजरात जैसे कपास बेल्ट में किसान पहले से ही आत्महत्या करने को मजबूर हैं। जनवरी से मार्च 2025 के बीच सिर्फ महाराष्ट्र में 767 किसानों ने आत्महत्या की है। ऐसे में मोदी सरकार का यह कदम किसानों के लिए आत्मघाती साबित होगा। आप संयोजक ने घोषणा की कि सात सितंबर को गुजरात के सुरेंद्र नगर जिले के चोटिला में जनसभा होगी जिसमें किसान बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे। उन्होंने सभी किसान संगठनों और विपक्षी दलों से अपील की कि वे मोदी सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए एकजुट हों।
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