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नोएडा: एफएआर की सीमा हटने से ऊंची इमारतों के निर्माण का रास्ता साफ, रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

Wed, 04 Nov 2026 08:41 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

नोएडा में 45 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित आवासीय परियोजनाओं के लिए अधिकतम फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की सीमा हटाने से क्षेत्र में ऊंची इमारतों के निर्माण और शहर के वर्टिकल ग्रोथ का रास्ता साफ होगा।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नोएडा में 45 मीटर चौड़ी सड़कों पर स्थित आवासीय परियोजनाओं के लिए अधिकतम फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की सीमा हटाने से क्षेत्र में ऊंची इमारतों के निर्माण और शहर के वर्टिकल ग्रोथ का रास्ता साफ होगा। रियल एस्टेट डेवलपर्स का मानना है कि जमीन की कीमतें कुछ स्थानों पर 200 करोड़ रुपये प्रति एकड़ से भी अधिक पहुंचने के बीच यह नया नियम काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे डेवलपर्स को एक ही भूखंड पर अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र मिलेगा, जिसका उपयोग वे अधिक आवासीय इकाइयों के निर्माण और बिक्री के लिए कर सकेंगे। इससे परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता भी बेहतर होगी। हालांकि, निर्माण और आबादी बढ़ने के साथ शहर की मौजूदा बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका भी है। ऐसे में सड़कों, जलापूर्ति, जल निकासी और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं का विस्तार करना भी जरूरी होगा।

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गुलशन ग्रुप के डायरेक्टर दीपक कपूर का कहना हैं कि नोएडा में जमीन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और कुछ स्थानों पर यह 200 करोड़ रुपये प्रति एकड़ से भी अधिक पहुंच चुकी है। ऐसे में 45 मीटर चौड़ी सड़कों पर एफएआर की सीमा हटने से डेवलपर्स को जमीन का बेहतर उपयोग करने और एक ही भूखंड पर अधिक आवासीय इकाइयां बनाने का अवसर मिलेगा। इससे परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता भी बेहतर होगी। हालांकि, इसके साथ सड़कों, जलापूर्ति, जल निकासी और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करना जरूरी है।

वहीं, गौड़ ग्रुप के सीएमडी मनोज गौड़ कहते हैं कि एफएआर की सीमा हटने से डेवलपर्स को मौजूदा बाजार मांग और जमीन की कीमतों के अनुसार परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। नोएडा के विकसित इलाकों में बड़े भूखंडों पर जमीन खरीदना मुश्किल होता जा रहा है, ऐसे में इस फैसले से आवासीय इकाइयों की उपलब्धता बढ़ सकती है। हालांकि, अतिरिक्त निर्माण के साथ बढ़ती आबादी और यातायात का दबाव भी बढ़ेगा। इसलिए सड़कों और अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास भी उसी अनुपात में करना जरूरी होगा।
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काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी का कहना हैं कि जमीन की बढ़ती कीमतों ने खासकर मुख्य सड़कों के किनारे स्थित परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण कर दिया है। एफएआर की सीमा हटने से डेवलपर्स को जमीन की विकास क्षमता का बेहतर उपयोग करने और अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यह रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक कदम है। हालांकि, इसके साथ मंजूरी की प्रक्रिया स्पष्ट रखने और बुनियादी सुविधाओं की क्षमता का आकलन करना भी जरूरी है।

सीआरसी ग्रुप के डायरेक्टर बिज़नेस मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग सलिल कुमार का कहना हैं कि नोएडा में किसी भी रियल एस्टेट परियोजना की लागत में जमीन की कीमत सबसे बड़ा हिस्सा होती है। 45 मीटर चौड़ी सड़कों पर एफएआर की सीमा हटने से डेवलपर्स को परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने और बाजार में अधिक आवासीय इकाइयां उपलब्ध कराने का अवसर मिलेगा। इससे जमीन का बेहतर उपयोग संभव होगा। हालांकि, बढ़ती आबादी के साथ सड़कों, जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं का भी विस्तार करना जरूरी होगा।

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