मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता दिवस
ईएसआईसी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में 60 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित
तीन साल में तीन गुना बढ़े कीमोथेरेपी कराने वाले मरीज. एनआईसीपीआर की रिपोर्ट छह साल में 922 मौतें
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में महिलाओं में आने वाले कैंसर के मामलों में लगभग 60 प्रतिशत मरीज ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के हैं। इनमें से अधिकतर मरीजों की कीमोथेरेपी चल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण जीवनशैली में बदलाव है। उन्होंने सलाह दी कि महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की स्वयं जांच करनी चाहिए। समय पर कैंसर का पता चलने पर बेहतर होने की संभावना कई गुणा अधिक हो जाती है।
कीमोथेरेपी यूनिट के इंचार्ज डॉ. सुशांत कुमार ने बताया कि हर महीने लगभग 100 मरीजों की कीमोथेरेपी की जा रही है। कीमोथेरेपी की अवधि मरीज के कैंसर के प्रकार पर निर्भर करती है। इन मरीजों में लगभग 50 से 55 प्रतिशत महिलाएं होती हैं जिनमें से 60 प्रतिशत महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। अस्पताल की डीन डॉ. हरनाम कौर ने बताया कि अब अस्पताल में दोहरी दवा (डबल ड्रग) की सुविधा भी उपलब्ध है जबकि पहले कीमोथेरेपी में केवल एक ही दवा दी जाती थी। यह कीमोथेरेपी यूनिट 26 जुलाई 2023 को शुरू की गई थी। उस दौरान महीने में केवल 25 से 30 मरीजों को ही कीमोथेरेपी दी जाती थी लेकिन अब यह संख्या 100 के आसपास पहुंच गई है।
पुरुषों में कान, नाक व गले के कैंसर के ज्यादा मामले
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, पुरुषों में सबसे अधिक मामले कान, नाक और गले के कैंसर के देखे जा रहे हैं। कई मरीजों को उपचार के लिए फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा है।
जांच कराने वालों की संख्या में बढ़ोतरी
जिला अस्पताल में कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां आने वाले किसी मरीज में कैंसर की आशंका होती है तो उसको उसे राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर) में रेफर किया जाता है। अगर वहां पर जांच में कैंसर की पुष्टि हो जाती है तो मरीज को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल रेफर किया जाता है। यहां पर सोमवार से शुक्रवार तक ओपीडी चलती है, जहां मुंह, ब्रेस्ट और सर्विक्स कैंसर की जांच की जाती है। एनआईसीपीआर की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 2016 से 2021 के बीच 922 लोगों की मौत कैंसर से हो चुकी है।
जीवनशैली सबसे बड़ी वजह
डॉक्टरों का कहना है कि वैसे तो ब्रेस्ट कैंसर की कई वजहें होती हैं। हालांकि, जीवनशैली, धूम्रपान, शराब का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, प्रजनन संबंधी व्यवहार में बदलाव जैसे देर से शादी करना या बच्चा न होना, हार्मोनल बदलाव आदि इसके मुख्य कारण हैं।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
- स्तन में गांठ बनना। यह अक्सर बिना दर्द के धीरे-धीरे बढ़ती है।
- ब्रेस्ट का आकार या शेप बदलना, स्किन में सिकुड़न या खिंचाव आना।
- निप्पल का अंदर की ओर मुडना या डिस्चार्ज आना।
- बगल या गले में गांठ महसूस होना
ऐसे करें जांच
प्रजनन आयु की महिलाएं हर महीने ब्रेस्ट की स्वयं जांच करें। अगर किसी की ब्रेस्ट शुरू से ही छोटी बड़ी है तो वो कैंसर नहीं है लेकिन अगर कुछ नया बदलाव है तो डॉक्टर को दिखाए। पीरियड्स खत्म होने के 2-3 दिन बाद जांच करना सबसे उचित समय होता है। शीशे के सामने खड़े होकर ब्रेस्ट की शेप, साइज और त्वचा पर ध्यान दें। किसी भी गांठ, सिकुडन या स्राव पर ध्यान दें। उंगलियों से ब्रेस्ट, बगल और गले की तरफ हल्के दबाव से जांच करें।
मेटास्टेटिक का अर्थ
मेटास्टेटिक एक ऐसा शब्द है जिसका प्रयोग यह बताने के लिए किया जाता है कि कैंसर या कोई बीमारी अपने मूल स्थान से शरीर के किसी अन्य हिस्से में फैल गई है।