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रजिस्ट्री का काम ठप, तीन दिन में 25 करोड़ का नुकसान

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नोएडा। डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री बंद करने के बाद शुरू हुए विवाद के तीसरे दिन भी बार एसोसिएशन के वकील व बैनामा लेखक हड़ताल पर बैठे रहे। हड़ताल समाप्त कराने के लिए एसडीएम दादरी और सिटी मजिस्ट्रेट की दोपहर बाद तक वकीलों से बातचीत हुई, लेकिन वकीलों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री शुरू नहीं की जाती, हड़ताल जारी रहेगी। इधर, तीन दिनों की हड़ताल से ही शासन को प्रति दिन के करीब आठ करोड़ रुपये के हिसाब से करीब 25 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। नए साल पर ज्यादातर लोग घर की रजिस्ट्री कराते हैं, लेकिन इस बार उन्हें निराश ही लौटना पड़ा।
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बार एसोसिएशन वकील एवं बैनामा लेखक के अध्यक्ष श्यामवीर सिंह बैसोया ने बताया कि अक्तूबर में दादरी विधायक तेजपाल नागर ने शासन से पूछा था कि डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री आखिर बंद क्यों है। इस पर जवाब आया था कि रजिस्ट्री बंद नहीं है। वहीं, दिसंबर में शासन के आदेश में रजिस्ट्री पर लगी रोक को खत्म करने की बात कही गई थी। इस पर आईजी स्टांप ने आदेश की कॉपी एआईजी स्टांप को भेज दी थी। एआईजी स्टांप के आदेश पर आधा दिसंबर बीतने के बाद डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री शुरू करा दी गई, लेकिन तीन-चार दिन के बाद ही जिलाधिकारी का अचानक आदेश आया और डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री बंद कर दी गई।
वहीं, बार एसोसिएशन के वकील एवं बैनामा लेखक के महासचिव एलसी शर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी ने मौखिक आदेश पर डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री बंद कराई गई है, जो पूरी तरह से गलत है। जब शासन स्तर से ही आदेश जारी कर दिया गया है तो जिलाधिकारी आखिर क्यों रजिस्ट्री पर रोक लगाकर मनमानी करना चाहते हैं।
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जिलाधिकारी बोले- भूमाफिया कर रहे खेल
जिलाधिकारी सुहास एलवाई का कहना है कि डूब क्षेत्र में रजिस्ट्री पर रोक अचानक नहीं लगाई गई है। यह रोक 30 सितंबर 2020 से लागू है। इसके लिए उन्होंने लिखित में आदेश किया हुआ है। जिले में भूमाफिया ने डूब क्षेत्र की काफी जमीन बेचकर गरीबों को बेवकूफ बनाया है। डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी के निर्णय के बाद डूब क्षेत्र में रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई थी। इस कमेटी में पुलिस-प्रशासन समेत विभिन्न विभागों के आठ से दस अधिकारी शामिल होते हैं। यह कमेटी सीधे तौर पर गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। डूब क्षेत्र में कुछ भूूमाफिया सक्रिय हैं, जो भोले लोगों को जमीन बेचकर उनकी जीवन भर की कमाई हड़पना चाहते हैं, जबकि वह जानते हैं कि कोई भी व्यक्ति डूब क्षेत्र में मकान नहीं बना पाएगा। डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी के निर्णय को बदलने का अधिकार सिर्फ स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी को है। अगर कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी भूमाफिया का साथ देगा तो निश्चित रूप से उसे जेल भेजा जाएगा। तीन-चार दिनों तक जो डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री कराई गईं है, उनके मामले में भी अब एक सिविल कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। उनकी दाखिल खारिज भी रोकी जाएगी।
पांच करोड़ के स्टांप हुए बेकार
इस पूरे प्रकरण में एक पक्ष ऐसा भी है, जिसका अधिकारियों की आपसी खींचतान और अधिवक्ताओं की हड़ताल से कोई मतलब नहीं है, लेकिन सीधे तौर पर प्रभावित वही हो रहे हैं। दरअसल, कुछ दिनों के लिए जब डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री खुली तो यहां जमीन खरीदने वालों ने जल्द जमीन की रजिस्ट्री करानी चाही। इसके लिए उन्होंने इधर-उधर से रुपयों का इंतजाम किया और स्टांप पेपर खरीद लिए। अचानक ही जब रजिस्ट्री बंद कराई गई तो ऐसे लोगों के स्टांप भी अटक गए। वकीलों की माने तो करीब पांच करोड़ के स्टांप ऐसे हैं जो अगर रजिस्टर्ड नहीं किए गए तो वह बेकार हो जाएंगे, क्योंकि इन स्टांप पेपर पर उक्त जमीन की रजिस्ट्री संबंधी जानकारी लिखी जा चुकी है।
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