नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने एक 5 साल के बच्चे की कार से कुचलकर हुई मौत के मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने आरोपी को उसके कानूनी प्रतिनिधियों को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मृतक बच्चे को किसी भी तरह से मुआवजा नहीं दिया जा सकता। कानूनी प्रतिनिधियों को उसकी मौत का सौदा करने का कोई अधिकार नहीं है। हादसे के समय चालक कथित तौर पर नशे की हालत में गाड़ी चला रहा था। याचिकाकर्ता विपिन गुप्ता के खिलाफ पहाड़ गंज पुलिस थाने में 2023 में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। उस पर लापरवाही से गाड़ी चलाने और ई-रिक्शा से टक्कर मारने का आरोप था, जिससे 5 साल के एक बच्चे को चोट लगी और उसकी मौत हो गई। संवाद