साइड स्टोरी दो
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300 रुपये खर्च कर पहुंचे पर नहीं मिला इलाज
- जिम्स में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण पूरी तरह बंद रही ओपीडी
- ओपीडी में पहुंचे करीब 1200 मरीज दिन भर रहे परेशान
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। एमबीबीएस छात्रों ने ओपीडी बंद वहीं पर धरना शुरू कर दिया। इससे जिम्स में इलाज कराने आने वाले मरीज और तीमारदार परेशान रहे। ज्यादातर मरीजों को लौटना पड़ा। सोमवार को एक मरीज 350 रुपये खर्च कर सस्ता इलाज कराने पहुंचा था, लेकिन उसे भी लौटना पड़ा।
जिम्स की ओपीडी में रोजाना करीब 1200 से ज्यादा मरीज इलाज कराने पहुंचते है। रविवार की छुटटी के बाद सोमवार को बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे थे। एमबीबीएस के छात्र ओपीडी को पूरी तरह बंद कर धरने पर बैठ गए। हंगामा बढ़ता देख सुरक्षाकर्मियों ने भी ओपीडी की बिल्डिंग के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया। सूरजपुर निवासी पुष्पा अपनी गर्भवती बहु भावना को लेकर पहुंची थी। उनका कहना है कि घर से अस्पताल आने और जाने में 350 रुपये खर्च होते हैं। पुष्पा ने बताया कि बहु को पेट दर्द की शिकायत थी। उसी को लेकर यहां पहुंचे, लेकिन ओपीडी में जाने नहीं दिया। बाद में पता चला कि हड़ताल चल रही है। परेशान पुष्पा अपनी बहु को लेकर लौट गईं। वहीं राजवीर अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। उनको छाती में संक्रमण है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने एक सप्ताह की दवा दी थी। जो खत्म हो चुकी है। वह डॉक्टर से दवाइयां लेने आए थे। उन्होंने पुराने पर्चे पर मेडिकल स्टोर से दवा लेने का भी प्रयास किया। असफल होने पर वह लौट गए।
जान बचाने को कोई पहली तो कुछ दूसरी मंजिल से कूदे छात्र
ग्रेटर नोएडा। जीबीयू के मुंशी प्रेमचंद हॉस्टल में सुरक्षाकर्मियों को बेकाबू देखकर कई छात्र पहली मंजिल से कूद गए। जबकि कुछ छात्रों ने दूसरी मंजिल से भी छलांग लगा दी। इसमें किसी का पैर टूट गया है तो किसी की रीढ़ की हड्डी में चोट आई है। छात्र उस मंजर को याद करके सहम जाते हैं। पहली मंजिल से कूदने वाले एमबीबीएस फाइनल इयर के छात्र अशुतोष ने बताया कि करीब 10 बजे 50-60 सुरक्षाकर्मियों ने हॉस्टल पर हमला किया। कुछ सुरक्षाकर्मियों के हाथों में बंदूक थी। जबकि कई के हाथ में लोहे की रॉड और लाठी थी। आरोपी सबको बुरी तरह पीट रहे थे। हमलावरों ने दरवाजा तोड़कर कमरे में मौजूद छात्रों से मारपीट की। एक सुरक्षा कर्मी ने उसके सिर पर भी लोहे ही रॉड से हमला किया, लेकिन वह बच गया। डर के कारण वह पहली मंजिल से नीचे कूद गया। जिससे उनके पैर में फ्रैक्चर आ गया है। एक छात्र ने बताया कि करीब डेढ़ घंटे तक सुरक्षाकर्मियों ने तांड़व मचाया। घटना के बाद से छात्र काफी डर गए है और वापस नहीं जाने रहे है।
बेहोश होने के नाटक ने बचा ली जिंदगी
एमबीबीएस के छात्र कौकव खान के सिर में गंभीर चोट आई है। वह अस्पताल में भर्ती है। उसने बताया कि एक साथ कई हमलावरों ने हमला किया। उसे नीचे गिराकर जमकर पीटा। जब तक खून नहीं निकला, तब तक मारते रहे। अगर वह बेहोश होने का नाटक नहीं करता तो हमलावर मारते रहते। हमलावर जान से मारने की नियत से हमला कर रहे थे।
उठ रहे सुरक्षा पर सवाल
- डेढ़ घंटे तक हंगामा और बवाल के दौरान छात्रों को बचाने कोई क्यों नहीं पहुंचा
- अगर छात्रों ने पहले हमला किया तो सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को सूचना क्योें नहीं दी
- अगर छात्रों ने नियम तोड़ा था तो झगड़े हमले की नौबत कैसे आई
- किसी एक छात्र ने गलती की तो निर्दोष छात्रों पर हमला क्यों