कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चार दिवसीय राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव का 28 अक्तूबर को आगाज होगा जिसमें राज्यपाल व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. अशीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सैनी भी शरीक होंगे। छह मंचों पर 34 विधाओं में करीब 3500 कलाकार प्रतिभा से धूम मचाएंगे और पदमश्री कलाकार एवं फिल्मी हस्तियां भी महोत्सव में पहुंचेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने महोत्सव की तैयारी पूरी कर ली है और युवाओं में पूरा जोश व उत्साह बना हुआ है।
महोत्सव में हरियाणवी व्यंजन में हरियाणवी खान-पान की धूम रहेगी जिसमें देशी घी का चूरमा, कसार, खिचड़ी, लस्सी, खीर, पूडे़, गुलगुले व सवाली आदि विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। इस बार क्राफ्ट मेले के अंतर्गत स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों के हाथ से बनाए सामान की विशेष स्टाॅल लगाई जाएगी।
वीरवार को सीनेट हॉल में पत्रकारों से चर्चा में कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि रत्नावली महोत्सव हरियाणवी लोक कला एवं संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब से विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है तभी से हरियाणा दिवस सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम के रूप में आयोजित होता था। वहीं सन् 1985 में आठ से 10 विधाओं से शुरू होकर आज राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव 34 विधाओं तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जिसने अपनी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए वर्ष 2006 में केयू धरोहर हरियाणा संग्रहालय की स्थापना कर धरोहर जैसे संग्रहालय को स्थापित किया। रत्नावली महोत्सव के माध्यम से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने हरियाणवी रसिया डांस, हरियाणा ऑरकेस्ट्रा, हरियाणवी रिचुअल, लूर नृत्य, हरियाणवी पगड़ी, हरियाणवी लोक विनोद, हरियाणवी गायन शैलियां, हरियाणवी सांग को जीवंत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महोत्सव का उद्देश्य युवाओं को हरियाणवी संस्कृति से जोड़ना, लोक कलाओं को संरक्षित करना और ग्रामीण विरासत को मंच प्रदान करना है। इस मौके पर कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने केयू रत्नावली पोस्टर का भी विमोचन किया और लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया व युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला भी मौजूद रहे।
हरियाणावी बोली को भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयास
कुलपति ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणवी बोली को भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रयास करेगा। इसका प्रयास राज्य स्तरीय रत्नावली महोत्सव से शुरू होगा और विश्वविद्यालय हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलाने तक इस प्रयास में लगा रहेगा। हरियाणा का प्रत्येक व्यक्ति इस कमी को महसूस करता है कि अपनी बोली भाषा के रूप में स्थापित हो, इसके लिए विश्वविद्यालय पहल शुरू कर रहा है और महोत्सव में यह प्रयास मंच संचालन से लेकर हरियाणवी समाचार पत्र निकालने तक कई रूपों में दिखाई देगा।
हरियाणवी लोक कला के लिए वरदान बनेगा महोत्सव
महोत्सव में हरियाणवी लोक कला को संरक्षित करने में वरदान साबित होगा। हरियाणवी लोक कला में हरियाणवी सांग, लूर, हरियाणवी ऑरकेस्ट्रा, रसिया, रीति-रिवाज, हरियाणवी पगड़ी, हरियाणवी गायन शैलियों, हरियाणवी हस्तशिल्प, हरियाणवी परिधान, हरियाणवी लोक कलाएं, सांझी, चित्तण, मांडणे, हरियाणवी फुलकारी, फुलझड़ी, हरियाणा की बुनाई कला, कढ़ाई कला, बोहिया निर्माण कला, इंडी निर्माण कला के माध्यम से हरियाणा की लोक कला को रत्नावली के माध्यम से संरक्षित किया जाएगा।
34 विधाओं के लिए सजाए जाएंगे छह मंच
महोत्सव में छह मंचों से 34 विधाओं में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लगभग 3500 प्रतिभागी प्रतिभागिता करेंगे। संगीत कार्यक्रमों में हरियाणवी समूह गायन, हरियाणवी लोकगीत, हरियाणवी भजन, हरियाणवी रागनी, पॉप सॉन्ग हरियाणवी, हरियाणवी फॉक इंस्ट्रूमेंट सोलो, हरियाणवी फोक ऑरकेस्ट्रा, ड्यूट रागनी, हरियाणवी गजल शामिल हैं।
थियेटर में हरियाणवी चौपाल, हरियाणवी सांग, हरियाणवी वन-एक्ट-प्ले, हरियाणवी स्किट, हरियाणवी रिचुअल्स, मोनो एक्टिंग इन हरियाणवी, शॉर्ट फिल्म इन हरियाणवी शामिल हैं। इसके साथ ही डांस विधा में हरियाणवी लूर नृत्य (न्यू इवेंट), हरियाणवी सोलो डांस पुरुष और महिला, रसिया ग्रुप डांस (हरियाणवी), हरियाणवी ग्रुप डांस, हरियाणवी कोरियाग्राफी शामिल है।
ललित कला में हरियाणवी फैशन शो (न्यू इवेंट), ऑन द स्पॉट पेंटिंग ऑन हरियाणा, पेंटिंग प्रदर्शनी ऑन हरियाणा, हरियाणवी पगड़ी, प्राचीन ऐतिहासिक हरियाणवी संग्रह, फॉक कॉस्टयूम पुरुष, फॉक कॉस्टयूम महिला और फॉक हैंडिक्राफ्ट प्रतियोगिता शामिल हैं। लिट्रेरी इवेंट में हरियाणवी प्रश्नोत्तरी, हरियाणवी कविता, हरियाणवी में भाषण और टिट-बिट्स प्रतियोगिता इन हरियाणवी सम्मिलित है।
मुख्यमंत्री करेंगे विशेष न्यूज बुलेटिन का विमोचन
महोत्सव में मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की ओर से पहली बार हरियाणवी में निकाले जाने वाले केयू रत्नावली विशेष न्यूज बुलेटिन का विमोचन करेंगे। निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि इस तरह के प्रयास हरियाणवी भाषा को उन्नत एवं प्रचार-प्रसार करने में सार्थक साबित होंगे।