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Noida News: क्यूआर कोड व्यवस्था हुई बेअसर, शिकायतों के लिए 1912 ही सहारा

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- प्रदेश में सबसे पहले गौतमबुद्ध नगर में शुरू हुई थी सुविधा, प्रचार-प्रसार के अभाव में उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंची योजना
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। विद्युत निगम की ओर से उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए शुरू की गई क्यूआर कोड व्यवस्था कुछ ही समय बाद बेअसर साबित हो गई। शिकायत दर्ज कराने के लिए शुरू की गई इस सुविधा का लाभ अब चुनिंदा उपभोक्ता ही उठा पा रहे हैं। प्रचार-प्रसार के अभाव में अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं हो सकी, जिसके चलते उपभोक्ता आज भी पुरानी व्यवस्था यानी 1912 हेल्पलाइन पर निर्भर हैं।
विद्युत निगम ने मई माह में क्यूआर कोड व्यवस्था शुरू की थी। इसके माध्यम से उपभोक्ता मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर बिजली संबंधी शिकायत दर्ज करा सकते थे। गौतमबुद्ध नगर प्रदेश का पहला जिला था, जहां इस सुविधा की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को कार्यालयों के चक्कर से राहत देना और शिकायतों का त्वरित समाधान करना था। हालांकि, व्यवस्था शुरू होने के बाद निगम की ओर से इसका व्यापक प्रचार नहीं किया गया। नतीजा यह रहा कि बहुत कम शिकायतें क्यूआर कोड के माध्यम से दर्ज हुईं। वहीं, जिन शिकायतों का पंजीकरण हुआ, उनके समाधान में भी समय लगा। ऐसे में उपभोक्ताओं का भरोसा इस सुविधा से कम होता गया।
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1912 पर निर्भर 4.5 लाख उपभोक्ता-
गौतमबुद्ध नगर में विद्युत निगम के करीब 4.5 लाख उपभोक्ता हैं। बिजली आपूर्ति, फाल्ट या अन्य समस्याओं की शिकायत के लिए आज भी अधिकांश उपभोक्ता 1912 हेल्पलाइन का ही उपयोग कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान में देरी होती है। जिले से निगम को बड़ी मात्रा में राजस्व मिलने के बावजूद उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं।
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